देहरादून- प्रदेश में 67 फीसदी गर्भवती महिलाएं खून की कमी (एनीमिया) से जूझ रही हैं। बीते एक साल में दो लाख 29 हजार 256 गर्भवती महिलाएं प्रदेशभर के समस्त अस्पतालों में पंजीकृत हुई। इसमें से एक लाख 48 हजार 509 महिलाओं में हीमोग्लोबिन कम पाया गया। चिह्नित महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम मिला है। पूर्व में जारी फैमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट के अनुसार भी प्रदेश में करीब 60 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया से जूझ रही हैं। मेडिकल कॉलेज की महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के अनुसार हीमोग्लोबिन का स्तर कम होना खून की कमी का लक्षण है।
गर्भवती महिलाओं में खून की कमी होने पर शिशु के साथ ही गर्भवती की जान को भी खतरा बढ़ जाता है। खून की कमी के कारण समय पूर्व प्रसव होना एक बड़ी समस्या है। इसलिए जरूरी है कि गर्भावस्था के समय आयरन की कमी न हो। आयरन और फॉलिक एसिड से ही शरीर में हीमोग्लोबिन बनता है। गर्भावस्था के समय हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य रूप से 12 से 15 ग्राम प्रति डेसीलीटर के मध्य होना चाहिए। हीमोग्लाबिन ऑक्सीजन को शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाता है। गर्भावस्था के समय इसकी ज्यादा जरूरत होती है, ताकि गर्भ में पल रहे शिशु का सही विकास हो सके।
