
देहरादून। उत्तराखंड के चर्चित प्रकरण राष्ट्रीय राजमार्ग 74 की जांच जैसे-जैसे आगे गढ़ रही है, असली दोषियों की पोल खोलने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। इसका प्रमाण आईएएस अधिकारी इस मामले पर शासन द्वारा निलंबित किए गए डॉ. पंकज पांडे द्वारा जारी किए गए दस्तावेज है जो इस बात के संकेत है कि आईएएस अधिकारी केवल मोहरा थे, इसके पीछे बड़े सफेदपोश शामिल है। कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इसमे सघनता से जांच की गई तो कई सफेदपोश सामने आएंगे और आईएएस और पीसीएस अधिकारी बच निकलेंगे। त्रिवेंद्र सरकार ने सत्ता संभालते ही भ्रष्टाचार जीरो टॉलरेंस का दावा किया था और राष्ट्रीय राजमार्ग 74 की जांच प्रारंभ कर दी थी जिसमें अब तक 22 लोग जेल जा चुके हैं, जिनमें लगभग एक दर्जन पीसीएस अधिकारी भी शामिल है। इसी संदर्भ दो आईएएस अधिकारियों को भी निलंबित किया गया लेकिन डॉ. पंकज पांडे द्वारा सार्वजनिक किए गए इन प्रमाणों से स्पष्ट होता है कि मामले में कहीं न कहीं निर्देश अलग से होता रहा है। अधिकारियों पर संभवत: यह काम करने के लिए दबाव था जिसके प्रमाण यह साक्ष्य देते हैं। इन प्रमाण पत्रों से स्पष्ट है कि राष्ट्रीय राजमार्ग -74 भूमि मुआवजा घोटाले में डॉ. पंकज पांडेय ने मुआवजा प्रकरण को निपटाने के लिए बड़े अधिकारियों से अनुमति मांगी थी। उन्होंने अनुसूचित जाति, जनजाति की भूमि पर स्वामित्व के प्रकरण पर मुख्य सचिव से दिशा निर्देश मांगे थे। यह निर्देश 24 फरवरी 2015 को मुख्य सचिव से मांगे गए थे, इस संदर्भ में 30 अप्रैल 2015 को एक बैठक भी हुई थी।
राष्ट्रीय राजमार्ग – 74 के लिए उधम सिंह नगर जनपद में लगभग 300 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला सामने आया है। यह साक्ष्य यह बताने को काफी है कि इसके पीछे काफी प्रभावशाली लोग लगे थे। थारू जनजाति के लोगों की भूमि सौ रुपए के स्टांप पेपर पर लिखवाकर कब्जा और लोगों ने ले लिया था। जिसके कारण जिला प्रशासन नहीं तय कर पा रहा था कि भूमि और भवन का मुआवजा असली मालिकों को दिया जाए या अनुबंध करने वालों को। इस संदर्भ में डॉ. पांडे ने दिशा -निर्देश मांगे थे। डॉ. पांडे द्वारा जारी किए गए इन प्रमाणों से यह स्पष्ट हो रहा है कि इस मामले में अधिकारी केवल मोहरा भर थे। असली लाभार्थी और लोग थे।
राष्ट्रीय राजमार्ग 74 में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला हुआ था जो राज्य में बड़ा मुद्दा रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सत्ता संभालते ही इस मामले में कार्रवाई करने का एलान किया था। राज्य सरकार ने इस घोटाले की सीबीआई जांच की सिफ़ारिश भी की थी, लेकिन सीबीआई ने यह केस नहीं लिया। इसके बाद राज्य सरकार ने इस मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी थी।
अगस्त माह में इन दोनों आईएएस अधिकारियों से एसआईटी ने पूछताछ की थी और 11 सितंबर को इन अधिकारियों के निलंबन की पुष्टि कर दी गई। अब जब पानी सिर से ऊपर बढ़ गया है तब डॉ. पंकज पांडे द्वारा यह प्रपत्र जारी किए गए हैं जो लंबी साजिश का खुलासा करते हैं।
