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कर्णप्रयाग में आई दरारों से चिंतित शहर के लोग, सीएम धामी ने विस्तृत भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने के दिए निर्देश।

देहरादून – बद्रीनाथ धाम की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव जोशीमठ शहर पहले ही भूधंसाव का दंश झेल रहा है और अब कर्णप्रयाग ने भी चिंता बढ़ा दी है। कर्णप्रयाग की जोशीमठ जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन विभिन्न कारणों से शहर के एक हिस्से में भवनों को क्षति पहुंची है। अभी तक ऐसे 48 भवन चिह्नित किए जा चुके हैं, जिनमें दरारें आई हैं।

पंचप्रयाग में से एक कर्णप्रयाग भी बद्रीनाथ यात्रा का दूसरा मुख्य पड़ाव है। यहां आई मुसीबत से पार पाने के लिए सरकार सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कर्णप्रयाग का विस्तृत भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। आईआईटी रुड़की और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी है।

आपदा प्रबंधन सचिव डा रंजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में अब पूरे कर्णप्रयाग का आइआइटी से जियो टेक्निकल और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण से भूगर्भीय सर्वेक्षण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि ‘कर्णप्रयाग के जिस क्षेत्र में भवनों में दरारें आई हैं, उसका आईआईटी रुड़की से जियो टेक्निकल सर्वे कराया जा रहा है।

कर्णप्रयाग शहर भी इन दिनों भवनों में दरारें पड़ने से चिंतित है। बहुगुणानगर व आईटीआई क्षेत्र में भवनों को अलग-अलग कारणों से नुकसान हो रहा है। यहां 22 घरों को क्षति पहुंची है। 48 ऐसे घर चिह्नित किए जा चुके हैं, जिनमें दरारें पड़ी हैं। इस परिदृश्य के बीच कर्णप्रयाग के लोग भी चिंता में घुले जा रहे हैं।

कर्णप्रयाग क्षेत्र के विधायक अनिल नौटियाल के अनुसार कर्णप्रयाग की स्थिति जोशीमठ से अलग है। यहां भवनों को पहुंची क्षति और दरारें पड़ने के भिन्न-भिन्न कारण हैं। कुछ घरों को पूर्व में सड़क निर्माण के दौरान क्षति पहुंची तो कुछ को अतिवृष्टि से। अलकनंदा व पिंडर नदियों से हो रहे भूकटाव को भी कारण माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि रेल परियोजना की टनल शहर से काफी दूर है। इससे भवनों को नुकसान पहुंचने की संभावना क्षीण है।

जोशीमठ को बचाने के लिए सरकार दिन-रात एक किए है। इसके साथ ही उसने कर्णप्रयाग पर भी ध्यान केंद्रित किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार कर्णप्रयाग की स्थिति का अपडेट ले रहे हैं। कर्णप्रयाग के विधायक नौटियाल ने भी मुख्यमंत्री से वार्ता कर प्रभावितों के पुनर्वास के साथ ही जोशीमठ की भांति कर्णप्रयाग का विस्तृत भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब इसे लेकर तंत्र भी सक्रिय हो गया है।

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