
कुलदीप राणा, रुद्रप्रयाग: एक ओर प्रदेश सरकार गांवों को आवाद करने की मुहिम छेडे हुए है तो वहीं दूसरी ओर सरकारी विभाग गांवों को खाली कराने का बीडा उठाये हुए हैं। सडक के अभाव में बच्छण्स्यूं पट्टी की पौडीखाल न्याय पंचायत के करीब एक दर्जन गांव खाली हो चुके हैं। बडी बात यह है कि यहां सडकें तो स्वीकृत हैं मगर विभाग सडक बनाने को तैयार नहीं है।
जनपद पौडी की सरहद से सटी रुद्रप्रयाग जनपद की पौडीखाल न्याय पंचायत के निषणी, पौडीखाल, बंगोली तैली, बंगोली सीली, ढुमणी, डगणी, कपलखील, पणधारा, चाम्यों, कलेथ, मरगांव, व सुनाउं गांवों की स्थिति इस कदर है कि यहां अब सिर्फ बुजुर्ग ही रह गये हैं सडक के अभाव में अधिकांश लोग प्लायन कर चुके हैं। यहां के लिए सडकें मंजूर तो है मगर विभागीय पेंचों के चलते आज तक भी सडक गांवों तक नहीं पहुंच पायी है। जिसके चलते ग्रामीणों को मीलों पैदल चलना पडता है।
जिलाधिकारी ने स्वयं पहली बार इन गांवों में जाकर जायजा लिया और स्वीकारा कि सडक के अभाव में गांव खाली हुए हैं। उन्होने लोक निर्माण विभाग को भी जमकर फटकार लगाई और ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि शीघ्र ही सडक का निर्माण पूरा कर लिया जायेगा।
वहीं रुद्रप्रयाग के विधायक भरत सिंह चैधरी का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकारों ने गांवों को आवाद करने की अपनी प्राथमिकता नहीं रखी मगर मौजूदा सरकार इस मसले पर गंभीर है और यही कारण है कि अलग से पलायन आयोग का गठन किया गया है। शीघ्र ही सडक का निर्माण कार्य पूरा करवाया जायेगा।
सरकारी दावे कितने मजबूत होते हैं यह साफ दिखता है खाली होते गांवों की स्थितियों को देखकर, मगर ताजुब यह है कि योजनाये तो स्वीकृत हैं मगर कार्य करने के लिए विभाग तैयार नहीं हैं ऐसे में किस तरह से गांवों को आवाद करने का सरकारी फैसला धरातल पर उतरेगा यह सवाल अभी भी अनसुलझा ही है।
