लोहाघाट : आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का धरना उस वक्त और उग्र हो गया जब उपजिलाधिकारी द्वारा उन्हें धरना स्थल से जबरन हटाया गया। 6 अप्रैल से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे इस आंदोलन को हटाए जाने पर कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया है। एसडीएम की कार्रवाई के बाद अब यूकेडी भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्थन में आ गई है।
लोहाघाट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में उबाल
लोहाघाट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। 6 अप्रैल से धरना दे रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उपजिलाधिकारी द्वारा धरना स्थल से जबरन हटाने के बाद आक्रोश और भी बढ़ गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में सभी कार्यकर्ता रामलीला मैदान पहुंच गईं, जहां पूरे दिन जोरदार धरना-प्रदर्शन जारी रहा। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शासन उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वे अब पीछे हटने वाली नहीं हैं।
एसडीएम की कार्रवाई के बाद यूकेडी भी उतरी समर्थन में
एसडीएम की कार्रवाई के बीच उत्तराखंड क्रांति दल के जिला पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी नाराज़गी जताई और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आंदोलन को खुला समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वालों को जबरन हटाना गलत है और ये जनता की आवाज दबाने का प्रयास है। धरना स्थल पर आयोजित सभा में ब्लॉक अध्यक्ष कविता पंत की अध्यक्षता और शर्मिला बोर के संचालन में कई वक्ताओं ने प्रशासन को घेरा।
लंबे समय से हमारे साथ हो रहा अन्याय
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से उनके साथ अन्याय हो रहा है। उनका कहना है कि सुपरवाइजर पद पर पदोन्नति में चंपावत जिले को शामिल किया जाए, न्यूनतम ₹24,000 मानदेय लागू किया जाए, रिटायरमेंट पर ₹10 लाख की एकमुश्त सहायता दी जाए। बायोमेट्रिक व्यवस्था तभी लागू हो जब राज्य कर्मचारी जैसा दर्जा व वेतन मिले। कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि “समान काम का समान वेतन” उनका अधिकार है। जब तक उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता, तब तक उन पर उसी तरह के नियम थोपना अन्यायपूर्ण है।