नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित किए जाने की मांग पर दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी, जिससे क्षेत्र के निवासियों को बड़ा झटका लगा है। यह मामला लंबे समय से चर्चा में था और स्थानीय लोग इस फैसले का इंतजार कर रहे थे।
बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की याचिका खारिज
ये याचिका चोरगलिया निवासी भुवन चंद्र पोखरिया द्वारा दायर की गई थी, जिस पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि राज्य सरकार पहले भी कई बार बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की घोषणा कर चुकी है और इस संबंध में विधानसभा से प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे यहां की बड़ी आबादी अपने अधिकारों से वंचित है।
वहीं दूसरी ओर, राज्य सरकार ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा 4 दिसंबर 2006 को नैनीताल, चंपावत और उधम सिंह नगर जिलों में वन भूमि के परिवर्तन पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसी कारण बिंदुखत्ता जैसे वन ग्राम को राजस्व गांव में बदलने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। सरकार ने ये भी कहा कि जब तक यह प्रतिबंध हटाया नहीं जाता, तब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई संभव नहीं है।
सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से ऐसा कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया गया, जिससे ये साबित हो सके कि वन भूमि हस्तांतरण पर लगा प्रतिबंध हट चुका है। इसी आधार पर कोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया। गौरतलब है कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की मांग वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी और बाद में रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा भी की गई थी, लेकिन अब तक यह मांग अधूरी ही बनी हुई है।