देहरादून– उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र 11 फरवरी से प्रस्तावित है। उम्मीद जताई जा रही है कि त्रिवेंद्र सरकार आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह बजट पेश करेगी। किसानों और महिलाओं को ब्याजमुक्त कर्ज, कारोबारियों को वैट व जीएसटी मामलों के निपटारे में रियायत, युवाओं के लिए नए रोजगार पैदा करने समेत मंत्रिमंडल के तमाम हालिया फैसले गवाही दे रहे हैं कि राज्य के अगले वित्तीय वर्ष का बजट खासा लोक–लुभावन रहने जा रहा है। मकसद साफ है लोकसभा के चुनाव। नए बजट में राज्य में मतदाताओं के हर वर्ग को नई घोषणाओं के जरिये गुलाबी अहसास कराने की तैयारी है।
बता दें कि वित्तीय वर्ष 2018-19 का बजट आकार 45585.09 करोड़ था। वहीं वित्तीय वर्ष 2019-20 बजट का आकार 50 हजार करोड़ को भी पार कर सकता है। सत्तारूढ़ भाजपा और प्रदेश सरकार के लिए वर्ष 2019 अहम हो चला है। मोदी लहर पर सवार होकर भाजपा ने वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव और फिर 2017 में विधानसभा चुनाव ही नहीं जीता, बल्कि कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर सूपड़ा साफ कर दिया। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव में राज्य की पांचों संसदीय सीट हासिल करने में भाजपा कामयाब रही थी। अब भाजपा सरकार पर इस प्रदर्शन को दोहराने का दबाव तारी है। लिहाजा मतदाताओं के हर तबके को लुभाने पर जोर है। लोकसभा चुनाव से ऐन पहले हो रहे बजट सत्र में त्रिवेंद्र रावत सरकार इसी कसरत में जुटी है।



