
देहरादून। यमकेश्वर का एक गांव जो वर्षों तक पानी न होने के कारण कठिनाइंयां झेल रहा था अब औरों के लिए आदर्श बन रहा है। यह महत्वपूर्ण दायित्व उठाया गांव के ही युवाओं के दल ने। इस दल ने झारखंड के दशरथ माझी का फिल्मी सफरनामे से सबक लेकर असंभव को संभव करने की ठान ली।
गंगा-यमुना समेत दर्जनभर से अधिक नदियों उत्तराखंड से निकलती हैं। उसके बाद भी पहाड़ों में कई गांवों के लोग आज भी पीने के पानी के लिए लंबा सफर करने को मजबूर हैं। हर सरकार से पीने के पानी की एक योजना के लिए आग्रह किया जाता है लेकिन पानी तो नहीं आता। इसी समस्या के समाधान के लिए गांव के ही युवाओं के दल ने भीष्म प्रतिज्ञा की और पानी का प्रबंधन कर लिया। लोग इस युवा के जोश और जज्बे और जुनून को सलाम कर रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यमकेश्वर प्रखंड के जुलेड़ी ग्राम सभा में स्थित ढोसन के ग्रामीणों ने पानी की समस्या का समाधान कर लिया। 200 लोगों की आबादी वाले इस गांव में योजना 15 मार्च से शुरू हुई। पांच सौ मीटर नीचे प्राकृतिक स्रोत से गांव के 40 परिवार अपने गांव तक पानी पहुंचाने में सफल रहे हैं। 40 परिवारों ने मिलकर तथा कुछ बाहरी लोगों एवं सामाजिक संस्थाओं की मदद से करीब 10 लाख में इस योजना को पूरा किया। करीब तीन किमी पाइप लाइन बिछाई गई, जिसमें दो महीने का वक्त लगा। इस कार्य की जिम्मेदारी नवयुवक मंगल दल ढोसन के युवाओं ने उठाई। समिति के अध्यक्ष हरेंद्र पयाल के नेतृत्व में यह कार्य संपन्न हुआ। योजना में मुख्य भूमिका में समिति के उपाध्यक्ष उमेद पयाल, सचिव सत्यपाल पयाल, कोषाध्यक्ष सुखपाल पयाल, प्रचार सचिव अरविंद पयाल एवं विनोद पयाल मुख्य रहे। आज सभी लोग युवाओं के जोश जज्बे और जुनून को सलाम कर रहे हैं।

पानी से शुरू होगा स्वरोजगार
प्राकृतिक स्रोत पर बनाए गए टैंक की क्षमता 40 हजार लीटर व गांव में बने दूसरे टैंक की क्षमता 60 हजार लीटर है। इस योजना से गांववालों को मिलने वाला पानी करीब पांच हजार लीटर प्रति घंटा होगा। पानी से गांव में स्वरोजगार उत्पन्न किया जाएगा। जिसमें 10 हेक्टेयर भूमि में बागवानी एवं आठ हेक्टयर भूमि में सब्जी का उत्पादन किया जाएगा। यमकेश्वर विधानसभा के लोग एवं सामाजिक संगठन इस योजना को देखने के लिए गांव में आ रहे हैं। क्षेत्र की विधायक रितु खंडूरी और गेंद मेला समिति के अध्यक्ष पूरण कैंतुरा ने ग्रामीणों के इस सफल मिशन की सराहना की है।
