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उत्तराखंड में ऐसे रुकेगा पलायन!

देहरादून । उत्तराखंड पलायन का शिकार हो रहा है इस बात से किसी को इनकार नहीं है लेकिन पलायन केवल उत्तराखंड में ही नहीं पूरे देश में हो रहा है। गांवों से शहरों की ओर जाना लगातार पूरे देश में चल रहा है। उत्तराखंड का पलायन भी राष्ट्रीय औसत के आसपास है। सीमांत क्षेत्रों के खाली होने की चिंता सरकार को है। इसके लिए सरकार ने ग्राम विकास एवं पलायन आयोग की संरचना की है। यह आयोग ग्राम्य विकास तथा पलायन पर विशेष चिंता करेगा। आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी मानते हैं कि पलायन तो हो रहा है लेकिन वर्ष 2011 के बाद स्थिति में बदलाव हुआ है। अब लोग अपने ही प्रदेश मेें सुविधाजनक स्थानों पर जाना चाह रहे हैं जिससे तमाम छोटे कस्बे विकसित हो रहे हैं। डॉ. एसएस नेगी की मान्यता इस मायने में सही मानी जा सकती है कि उत्तरांचल उत्थान परिषद जैसे संगठन पलायन रोकने का विशेष प्रयास कर रहे हैं, इसके लिए प्रवासी उत्तराखंडियों को आमंत्रण देना कम से कम अपने मूल गांव में कुछ रातों के लिए आने का आग्रह अब मूर्त रूप धारण करने लगा है। तमाम लोग पूरी तरह लौटने भी लगे है। पलायन की इस स्थिति को देखते हुए इस पर चिंता करने, ठोस एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग का गठन किया है।
आयोग पलायन के कारणों की पड़ताल में जुटा है और उसकी प्रारंभिक रिपोर्ट लगभग अंतिम चरण में है। आयोग के उपाध्यक्ष डॉ.एसएस नेगी का मनना है कि पलायन से संबंधित रिपोर्ट तैयार हो रही है। उन्होंने कहा कि पलायन को लेकर जैसी आमधारणा है, तस्वीर वैसी नहीं है। पलायन का राष्ट्रीय औसत प्रति हजार पर ढाई सौ लोग है। उत्तराखंड में भी पलायन की दर इसी के आसपास है। इसके अलावा अन्य राज्यों से हो रहे पलायन का भी तुलनात्मक अध्ययन चल रहा है।
डॉ.नेगी ने कहा कि आयोग के पास 2011 की जनगणना के आंकड़े तो थे, लेकिन इसके बाद पिछले सात वर्षों में क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं थी। इसे देखते हुए आयोग ने राज्य की 7950 ग्राम पंचायतों में पलायन, पहले और अब की स्थिति, मूलभूत सुविधाएं, शिक्षा, रोजगार समेत तमाम सवालों को लेकर सर्वे किया। उन्होंने कहा कि 2011 के बाद स्थिति बदली है।
आयोग के उपाध्यक्ष ने बताया कि तमाम जिलों में लोग गांवों से अपने ही जिले में सुविधानजक स्थानों पर शिफ्ट हुए हैं। इससे छोटे-छोटे कस्बे विकसित हो रहे हैं। इसके चलते कई गांवों में जनसंख्या घटी है। उनके अनुसार सर्वे में ये बात भी सामने आई कि लगभग सभी जिलों में पूर्व में गांव छोड़कर गए लोग वापस लौटे हैं। हालांकि, उन्होंने इनकी संख्या का खुलासा करने से इनकार कर दिया।
पलायन की स्थिति को लेकर इन दिनों आयोग रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है। आयोग के उपाध्यक्ष के मुताबिक डाटा की क्रॉस चेकिंग की जा रही है। इसमें वक्त लग रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को रिपोर्ट 30 अप्रैल तक यह सौंपी जाएगी। पहले इसके लिए 15 अप्रैल की तिथि नियत थी।

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