आज हम आपको एक ऐसी ही दुर्लभ प्रजाति से मिलवाने जा रहे हैं जिसे आज से पहले आपने शायद ही देखा या सुना होगा। और वो प्रजाति है- ‘बरल’, जिन्हे ब्लू शिप्स के नाम से भी जाना जाता है। आपको बतादे कि उताखंड के उत्तरकाशी जीले में स्थित गंगोत्री नैशनल पार्क में पाए जाने वाले इस प्रजाति पर अभी से ही मौत का खतरा मंडराने लगा है। दरअसल, हाल ही में ब्लू शिप्स में एक अजीबोगरीब बीमारी देखने को मिली है, जो कि इनके अस्तित्व के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
इस अजीबो-गरीब बीमारी में पहले तो उनकी आँखों पर सफेद झिल्ली बनती है जिसके बाद आंखें लाल होकर फूल जाती हैं और फिर बाहर गिर जाती हैं। साथ ही उनकी आँखों से निरंतर खून भी टपक रहा है। अभी तक इस बीमारी की वजह से नौ ब्लू शीप्स के अंधे हो जाने की खबर है।
मिडिया रिपोर्ट के अनुसार गंगोत्री नेशनल पार्क में थलयसागर पर्वत और जोगिन पर्वत के बेस कैंप केदार ताल के आसपास ये ब्लू शीप एक पर्वतारोही दल को मिलीं ये पर्वतारोही दल एवरेस्ट पर चढ़ने की तैयारी के सिलसिले में इस इलाके में था। ये ब्लू शीप 14 हज़ार से 15 हज़ार फीट की ऊंचाई पर मिलीं।
इन्हें देखते ही पर्वतारोही दल ने गंगोत्री नेशनल पार्क के वन अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। वन्य जीव से जुड़े लोगों का कहना है कि ब्लू शीप्स में अगर ये एक संक्रामक रोग है तो इससे वहां के बाकी वन्यजीवों पर भी ख़तरा मंडरा रहा है।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार गंगोत्री नेशनल पार्क के अधिकारियों को इस बीमारी की कोई जानकारी नहीं थी। ट्रैकिंग पर आए बीएसएफ के एक दल ने इसकी सूचना वन विभाग को दी और इसके बाद ही वनाधिकारी हरकत में आए। आनन-फानन में रोग से पीड़ित एक भेड़ का नमूना इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आइवीआरआइ) बरेली को भेजा गया।
साथ ही मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डीबीएस खाती ने आइवीआरआइ बरेली के निदेशक को पत्र भेजकर भरल को चपेट में लेने वाले रोग की गहन जांच का आग्रह किया। पत्र में आइवीआरआइ के एक विशेषज्ञ दल को गंगोत्री नेशनल पार्क भेजने की गुजारिश भी की गई है।
