देहरादून- गुजरात के बाद उत्तराखंड सामान्य जाति के गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने वाला दूसरा राज्य बन गया है। सरकार ने उत्तराखंड लोक सेवा (आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण) अध्यादेश-2019 लागू कर दिया है। अब सरकारी पदों पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। अपर मुख्य सचिव कार्मिक एवं सतर्कता राधा रतूड़ी ने बताया कि केंद्र के संविधान संशोधन के बाद 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। गुजरात के बाद उत्तराखंड दूसरा राज्य है, जहां यह आरक्षण युवाओं को मिलेगा। अध्यादेश समस्त विभागों, उत्तराखंड लोक सेवा आयोग तथा अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को प्रेषित किया है। इसी के आधार पर भर्तियों के लिए विज्ञापन जारी होंगे। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के पक्ष में उत्तराखंड राज्य के उन स्थायी निवासियों को आरक्षण प्राप्त होगा, जो अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की मौजूदा योजना के अंतर्गत शामिल नहीं हैं। ऐसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के व्यक्ति जिनके परिवारों की सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय आठ लाख रुपये से कम हो आरक्षण के इस प्रयोजन के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में चिन्हित हैं। आय की गणना वेतन, कृषि, व्यवसाय, पेशा आदि से प्राप्त आय शामिल की गई है। लाभार्थी को आवेदन के लिए वर्ष से पूर्व वित्तीय वर्ष के लिए आय से संबंधित दस्तावेज देने होंगे।