Monday, March 2, 2026
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Uttarakhand Panchayat Election: दिग्गजों का सियासी गणित फेल , पत्नी-बेटे भी नहीं दिला पाए जीत!

Uttarakhand Panchayat Election: लैंडसडाउन बीजेपी विधायक दलीप रावत की पत्नी चुनाव हारी, सल्ट विधायक महेश जीना और सरिता आर्या के बेटे हारे। 

देहरादून: उत्तराखंड पंचायत चुनाव परिणामों ने कई राजनीतिक दिग्गजों की साख पर गहरी चोट की है। बीजेपी के तीन मौजूदा विधायकों के परिजन चुनाव हार गए, वहीं कई अन्य वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को भी करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस परिणाम ने न सिर्फ दावेदारों की साख पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी पर भी असर डालने के संकेत दिए हैं।

🔹 दलीप रावत की पत्नी चुनाव हारीं
लैंसडाउन से बीजेपी विधायक दलीप रावत की पत्नी नीतू देवी पौड़ी गढ़वाल में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव 411 वोटों से हार गईं। उनकी जीत के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद का दावा ठोका जाना था, लेकिन हार ने समीकरण बदल दिए।

🔹 महेश जीना के बेटे की हार
सल्ट के विधायक महेश जीना के बेटे करन जीना अल्मोड़ा जिले की बबलिया सीट से क्षेत्र पंचायत चुनाव हार गए। यह परिणाम उनके राजनीतिक प्रभाव पर सवाल खड़े करता है।

🔹 सरिता आर्या का बेटा भी पराजित
नैनीताल की भवालीगांव सीट पर बीजेपी विधायक सरिता आर्या के बेटे को कांग्रेस समर्थित यशपाल आर्या ने 1200 वोटों से हरा दिया। सरिता खुद कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होकर विधायक बनी थीं।

🔹 दोहरा झटका: नेता और पत्नी दोनों हारे
अल्मोड़ा में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के मंडल अध्यक्ष संतोष कुमार राम और उनकी पत्नी पूजा देवी दोनों चुनाव हार गए। संतोष तीसरे स्थान पर रहे जबकि पूजा भी जीत से कोसों दूर रहीं।

🔹 पूर्व मंत्री की पत्नी को भी हार
पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी की पत्नी और निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष रजनी भंडारी चमोली जिले के रानों वार्ड से चुनाव हार गईं। भंडारी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे।

🔹 बेला तोलिया को छवि बोरा ने दी मात
नैनीताल की रामड़ी आनसिंह सीट पर बीजेपी की निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया को निर्दलीय छवि बोरा कांडपाल ने हराया। यह बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की हार मानी जा रही है।

उत्तराखंड पंचायत चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि जनता अब सिर्फ राजनीतिक हैसियत या रिश्तों पर नहीं, काम और छवि के आधार पर वोट दे रही है। कई नेताओं के लिए यह हार 2027 की तैयारियों से पहले आत्ममंथन का मौका भी बन सकती है।

 

 

 

 

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