देहरादून : राज्यपाल गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज लोक भवन परिसर में बहुउद्देशीय भवनों का शिलान्यास किया। लोक भवन परिसर में निर्मित किए जाने वाले इन भवनों में विभिन्न आवश्यक सुविधाओं का समावेश किया जाएगा।
लोक भवन में बहुउद्देशीय भवनों का शिलान्यास
लोक भवन में आज बहुउद्देशीय भवनों का शिलान्यास किया गया। जिसमें प्रथम भवन में एक समेकित डिस्पेंसरी का निर्माण किया जाएगा, जिसमें आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक एवं एलोपैथिक चिकित्सा कक्ष शामिल होंगे। वहीं दूसरे भवन में सूचना परिसर और कैफेटेरिया, तृतीय भवन में लोक निर्माण विभाग कार्यालय एवं चतुर्थ भवन में उद्यान विभाग कार्यालय का निर्माण किया जाना है। इन भवनों का निर्माण पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला के अनुरूप किया जाएगा, जिससे स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को भी सुदृढ़ किया जा सके।
एक ही परिसर में मिलेंगी समेकित सुविधाएं – राज्यपाल गुरमीत सिंह
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने इस अवसर परकहा कि इन नवीन भवनों के निर्माण से लोक भवन परिसर में विभिन्न सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे कार्यप्रणाली अधिक सुव्यवस्थित एवं प्रभावी बनेगी। उन्होंने कहा कि इससे न केवल कर्मचारियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि आमजन को भी बेहतर एवं त्वरित सेवाएं प्राप्त होंगी। समेकित सुविधाओं के माध्यम से समय और संसाधनों की बचत होगी तथा कार्यों में दक्षता आएगी।

राज्यपाल ने कहा कि इस परियोजना में आधुनिक तकनीक के साथ-साथ प्रदेश की सांस्कृतिक एवं पारंपरिक विरासत का समन्वय किया गया है, जो इसे विशिष्ट बनाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बहुउद्देशीय भवन लोक सेवा की भावना को और अधिक सशक्त करेगा तथा प्रशासनिक कार्यों के कुशल एवं प्रभावी निष्पादन में सहायक सिद्ध होगा।
सेवा प्रदान करने की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में ये कदम अहम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लोक भवन परिसर में विकसित की जा रही यह बहुउद्देशीय अवसंरचना सुशासन और सेवा प्रदान करने की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि एक ही परिसर में विभिन्न विभागों एवं सुविधाओं के उपलब्ध होने से प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा तथा नागरिकों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्राप्त होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन भवनों का निर्माण पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला के अनुरूप किए जाने से न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह स्थानीय संसाधनों एवं कारीगरों को भी प्रोत्साहन देगा।