क्या आपने पाताल लोक से धरती पर आए वृक्ष को देखा है ,,जी हाँ हम आपको दिखते है,, यही वो वृक्ष है सर्वकामनाओ को पूर्ण करने वाला परिजात वृक्ष जिसको कल्पतरु , कल्पदान ,कल्पवृक्ष भी कहते है पौराणिक मान्यता है की समुद्र मंथन से प्रकट हुए 14 रत्नो में से एक यह भी है
यह वृक्ष उत्तरप्रदेश के बाराबंकी जिले के रामनगर इलाके में है मान्यता है की समुद्र मंथन के बाद देवगण इसे स्वर्ग ले गए थे और पांडव अज्ञातवास के समय अपने तपोबल से इसे स्वर्ग से पृथ्वी पर आए,,खुद अर्जुन ने अपने बाण से पाताल तक छिद्र कर इसे रोपित किया था इसी कारण यह वृक्ष प्राचीन काल से पूज्यनीय रहा है आपको बतादे की पारिजात वृक्ष पाताल लोक से गहरे कुँए से बहार पृथ्वी पर निकला है जिसका तना लगभग 10 मीटर चौड़ा है खास बात यह भी है की हर साल अगस्त के महीने में इसमें सफ़ेद रंग का फूल आता है इसके पुष्प दर्शन से मानव कल्याण की अनुभूति होती है स्थानीय लोगो के मुताबिक इस अलौलिक वृक्ष के समान विश्व में दूसरा वृक्ष नहीं है
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