उत्तर प्रदेश से अलग हुए राज्य को सोलह साल हो गये है है लेकिन पश्चिमी यूपी के कुख्यात संगठित अपराधीयों की जकड से उत्तराखंड दूर नही हो पा सका। नामी बदमाश सुशील मूँछ से लेकर सुनील राठी और संजीव जीवा का आज भी कोप बरस रहा है। जेलो में नेटवर्क से लेकर भाडे पर हत्या, चौथ वसूली के बाद हरिद्दार के कंबल व्यापारी के मर्डर ने और भी बडा खुलासा किया है। खुलासा ये कि राजधानी सेंटर के रूप मे इस्तेमाल हो रही है। बात ज्यादा पुरानी नही है कि जब पंजाब के नाभा जेल ब्रेक के बडे कांड के आरोपीयों के दून में रहने की पुष्टि हुई है पुलिस ने इज्जत बचाने के लिये आनन फानन में अभियान चलाकर नौकर और पैंदा की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा चकराता में पंजाब के बडे बदमाश ठहरते है और बार्डर पर फायरिंग करते हुये फरार हो जाते है। ये बानगी मात्र है झारखंड का पचास हजार का ईनामी राजधानी दून में प्रापर्टी डीलिंग करने लगता है और झारखंड पुलिस पकड कर ले जाती है और दून पुलिस हाथ मसलते रह जाती है हरिद्दार के कंबल व्यापारी गोल्डी की सरेआम हुई हत्या और भी सवाल खडा कर रही है। 6 मार्च को गोल्डी की हत्या हुई तो बदमाशों को पता चला कि गलत हत्या हो गई। इसके तुरंत बाद पचास हजार का ईनामी फरार चल रहा शाहरूख दून के ईनामुल्ला बिलंडिंग के रहने वाले मुजाहिद के साथ रूडकी पंहुचा और दोबारा प्लानिंग करने लगा। ये रूडकी मे गेस्ट हाउस मे फर्जी आईडी पर रूके थे। इसी तरह शाहरूख 2016 में दून आकर रहा था। फिर इसी शाहरूख ने मुज्जफरनगर में अपने खिलाफ गवाह का मर्डर कर किया और फिर फरार हो गया। शाहरूख लखनऊ जेल में मुन्ना बजरंगी और अंसारी के संपर्क में रहा है फिलहाल जीवा का राइट हैंड है। अब सवाल राजधानी की शरण स्थली बनने पर लाज्मी है। पुलिस के आला अधिकारी राजधानी में जमीनों का अवैध कारोबार और पॉपुलेशन अधिक होने कारण अपराधी दून में शरण ले रहे है