आज शरद पूर्णिमा है। यह रात कई मायने में महत्वपूर्ण है। जहां इसे शरद ऋतु की शुरुआत माना जाता है, वहीं माना जाता है कि इस रात को चंद्रमा संपूर्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और अपनी चांदनी में अमृत बरसाता है। इसी वजह से लोग इस पूरी रात्रि को खीर बनाकर चांदनी में रख देते हैं, ताकि उसे प्रसाद के रूप में सुबह स्नान करके खाने के बाद निरोग हो पाएं।
शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर धरती पर आती हैं और देखती हैं कौन सा भक्त उनकी भक्ति में लीन है. इसलिए माना जाता है कि जो भक्त शरद पूर्णिमा तिथि को रात में जागकर मां लक्ष्मी की भव्य उपासना करता है, उसपर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसाती हैं.
मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन और श्रृद्धा से मां लक्ष्मी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. जिनकी कुंडली में धन का कोई योग ही ना हो, इस दिन की पूजा से प्रसन्न मां लक्ष्मी उन्हें भी धन-धान्य से संपन्न कर देती हैं.
शरद पूर्णिमा का महत्व
– शरद पूर्णिमा काफी महत्वपूर्ण तिथि है, इसी तिथि से शरद ऋतु का आरम्भ होता है.
– इस दिन चन्द्रमा संपूर्ण और सोलह कलाओं से युक्त होता है.
– इस दिन चन्द्रमा से अमृत की वर्षा होती है जो धन, प्रेम और सेहत तीनों देती है.
– प्रेम और कलाओं से परिपूर्ण होने के कारण श्री कृष्ण ने इसी दिन महारास रचाया था.
– इस दिन विशेष प्रयोग करके बेहतरीन सेहत, अपार प्रेम और खूब सारा धन पाया जा सकता है
अपार धन पाने के लिए क्या करें ?
– रात के समय मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं.
– इसके बाद उन्हें गुलाब के फूलों की माला अर्पित करें.
– फिर उन्हें सफेद मिठाई और सुगंध भी अर्पित करें.
– इसके बाद उनके मंत्र का कम से कम 11 माला जाप करें.
– मंत्र है- “ॐ ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्मये नमः”
– आपको धन का अभाव कभी नहीं होगा.
शरद पूर्णिमा व्रत विधि
– पूर्णिमा के दिन सुबह में इष्ट देव का पूजन करना चाहिए.
– इन्द्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर उसकी गन्ध पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए.
– ब्राह्माणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए.
– लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रूप से किया जाता है. इस दिन जागरण करने वालों की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है.
– रात को चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करना चाहिए.
– मंदिर में खीर आदि दान करने का विधि-विधान है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन चांद की चांदनी से अमृत बरसता है.