हरिद्वार : सावन माह में पंचक के दौरान बड़ी संख्या में शिवभक्त कांवड़ उठाने से परहेज करते हैं। इस धार्मिक मान्यता को लेकर नारायण शिला मंदिर के मुख्य पुजारी मनोज त्रिपाठी ने बताया कि धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण से लेकर रेवती नक्षत्र की समाप्ति तक का समय पंचक कहलाता है।
पंचक में क्यों नहीं उठाई जाती कांवड़ ?
नारायण शिला के मुख्य पुजारी के मुताबिक पंचक में शुभ कार्य पूरी तरह वर्जित नहीं होते, लेकिन जो श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं, उनके लिए मान्यता है कि एक बार जल चढ़ाने से जो फल मिलता है, पंचक में उसी कार्य की सिद्धि के लिए पांच बार प्रयास करना पड़ सकता है। इसलिए इस अवधि में कांवड़ उठाने से लोग बचते हैं।
नारायण शिला के मुख्य पुजारी ने बताई धार्मिक मान्यता
बता दें कि पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा, मकान की छत डालना, कॉलम खड़े करना और दाह संस्कार जैसे कार्यों को शास्त्रों में निषेध बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि इस समय किए गए कार्यों में बाधाएं या दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
हालांकि पंचक में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, मंत्र-जप और आराधना पर कोई रोक नहीं है। श्रद्धालु प्रतिदिन भगवान शिव का जलाभिषेक करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें, लेकिन कांवड़ यात्रा और अन्य निषिद्ध कार्यों से इस अवधि में बचना चाहिए।