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महिला शोषण की जाँच पर डीआईजी की कुंडली!

वरिष्ट पत्रकार अजित सिंह राठी की कलम से……
खास खबर : महिला शोषण की जाँच पर डीआईजी की कुंडली 
पूर्व डीजीपी पर लगे यौन शोषण की जाँच सात महीने बाद भी अधूरी 
एक शिक्षिका ने जून में की थी इलेट्रॉनिक सबूतों के साथ की शिकायत 
देहरादून। वर्ष 2014 में सर्वोच्च न्यायालय में ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस सथाशिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने फैसला दिया था कि कोई महिला यदि यौन शोषण जैसे संज्ञेय अपराध के घटित होने की शिकायत करती है तो तत्काल मुकदमा दर्ज होना चाहिए। इस मामले में न्यायलय ने सभी राज्यों व जाँच एजेंसियो से राय मांगी। सीबीआई समेत जयादातर राज्यों ने भी न्यायालय को यही राय दी थी। यह भी कहा कि ऐसे मामलो की यदि मुकदमा कायम होने से पहले जाँच होती है तो सात दिन में पूरी हो।  
फ़ाइल् फोटो, पूर्व डीजीपी बी एस सिद्धू

लेकिन उत्तराखंड में ऐसे मामलो में अफसर अपनी सहूलियत के हिसाब से कार्रवाई करते है। विगत पांच जून 2016 को मसूरी स्थित एक स्कूल की शिक्षिका ने राज्य के पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू पर यौन शोषण, जान से मरने की धमकी, धोखाधड़ी करने समेत तमाम गंभीर आरोप लगाए और मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की। यह कोई सामान्य शिकायत नहीं थी, पीड़ित शिक्षिका ने शिकायत पत्र में कहा कि उसके पास Electronic evidence  भी है। अब इस शिकायत का हश्र देखिये, सिस्टम ने शिक्षिका को रहत देने के बजाय खतोकिताबत में ज्यादा दिलचस्पी ली। प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्री, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, सीबीआई निदेशक, उत्तराखंड शासन, पुलिस महानिदेशालय उत्तराखंड और डीजीआई गढ़वाल के बीच कार्रवाई करने को लेकर चिट्ठी पतरियों में जितनी नैतिकता और गंभीरता दिखी, उसका दसवां हिस्सा भी यदि सिस्टम की कार्यप्रणाली में समाहित होता तो अब तक तस्वीर साफ हो चुकी होती। पुलिस की ढीली कार्य प्रणाली से पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू अभी भी आरोपी बने हुए है और शिक्षिका दरबदर भटक रही है। 

पीड़ित शिक्षिका ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि पूर्व डीजीपी के कृत्यों से वह और उसका परिवार मृत्यु के भय में जिए है। उसने एक बार उसके पति से सस्त्रधारा रोड स्थित उनके फ्लैट की चाबी ली और फिर वापस नहीं की। खुद को उस समय के मुख्यमंत्री का करीबी बताकर सिद्धू ने खूब धमकाया। जब भी खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की तो परिवार को जान से मरने की धमकी मिली। शिक्षिका ने शिकायत पत्र में कहा कि आरोपी ने उसे एक वीडियो भेजा जिसमे वह अपनी ग्लोक ऑटोमेटिक पिस्टल से फायरिंग कर रहा है। शिक्षिका ने कहा कि उसका शारीरिक शोषण किया गया। जब शिक्षिका का आरोप है कि जब उसने आवाज उठाई तो लुधियाना में पढ़ रहे उसके बेटे को वहां के पुलिस अधीक्षक सतनाम सिंह ने जेल भेजने व एनकाउंटर करने की धमकी दी। पूर्व डीजीपी ने जान से मारने की धमकी देकर एक ट्रस्ट के नाम जबरदस्ती दस लाख रूपये लिए। जिनकी चैक डिटेल भी दी गयी है। लेकिन पीड़ित शिक्षिका की शिकायत पर कोई करवाई तो हुई नहीं, इसके अलावा परम गोपनीय बताकर शासन से मिलने वाले निर्देशों और पत्रों को छुपाने का काम होता रहा। 
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करवाई के नाम पर डीआईजी की ‘पुलिसगिरी’ 
जब बार बार शासन और PHQ से जवाब माँगा जाने लगा तो डीआईजी गढ़वाल पुष्पक ज्योति ने विगत 13 दिसम्बर को एडीजी लॉ एंड आर्डर अशोक कुमार को भेजे पत्र में कहा कि 17.08.2017 को उक्त शिक्षिका के बयान अंकित किये गए थे, इसके बाद आरोपी पूर्व डीजीपी से लिखित में पक्ष लिया गया जो कि 08 अक्टूबर को मिला। बाद में 17 नवम्बर को पीड़ित शिक्षिका से एक बार फिर पूरक बयान लिए गए है। अभी शिक्षिका से कुछ और बिन्दुओ पर जवाब माँगा गया है, जिसके बाद ही जाँच पूरी हो सकेगी। 
यानि, महिला को बयान के नाम पर दो दो बार बुलाया गया और आरोपी से लिखित में बयान लिए गए, सात महीने में डीआईजी की कार्यप्रणाली देखकर लगता है कि वो पुराने बॉस के प्रति अभी भी निष्ठावान होने का परिचय देने से ज्यादा कुछ नहीं कर रहे है। 
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तब बगैर जाँच के शासन के अफसर गए थे जेल 
हरीश रावत सरकार में एक महिला की शिकायत मात्र पर ही शासन के अपर सचिव और संयुक्त सचिव स्तर के अफसरों को बगैर जाँच किये ही जेल भेज दिया गया था और आज वही पुलिस एक शिक्षिका की शिकायत पर कुंडली मरकर बैठ गयी है। 

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तारीखों के आईने में महिला की शिकायत का पोस्टमार्टम 
: 05 जून को पीड़ित शिक्षिका ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, मुख्यमंत्री उत्तराखंड, सीबीआई निदेशक, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी द्वारा यौन शोषण, जान से मरने की धमकी, जबरन प्रॉपर्टी हड़पने का आरोप लगाते हुए खुद की सुरक्षा की गुहार लगाई। 
: 14 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर पीड़ित शिक्षिका की शिकायत पर कार्रवाई करने को कहा। 
: 16 जून को डीआईजी सीबीआई स्पेशल यूनिट दिल्ली ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर कहा कि यह राज्य के पूर्व डीजीपी से जुड़ा मामला है इसलिए राज्य सरकार खुद कार्रवाई करें। 
: 20 जून को गृह सचिव ने डीजीपी को पत्र लिख मुख्यमंत्री को मिली महिला की शिकायत का हवाला देते हुए जाँच कर विधिसम्मत कार्रवाई करने को कहा। 
: 28 जून को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड के मुख्य सचिव को इस मामले में 08 सप्ताह के भीतर विधिसम्मत कार्रवाई करें। 
: 16 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मामले में समुचित कार्रवाई करने को कहा। 
: 28 जुलाई को अपर सचिव गृह ने पुन: डीजीपी को भेजे गए पत्र में डीआईजी सीबीआई स्पेशल यूनिट दिल्ली को भेजी गयी शिकायत का हवाला दिया और इस मामले में तत्काल कार्रवाई कर शासन को अवगत करने को कहा। 
: 29 जुलाई को PHQ ने फिर डीआईजी गढ़वाल को पत्र भेजकर तत्काल सुस्पष्ट जाँच आख्या भेजने को कहा। 
: 08 अगस्त को अपर सचिव गृह बीएस मनराल ने डीजीपी को पत्र भेजकर इस मामले में PHQ याद दिलाया कि 28.06.2017 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में आठ सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने को कहा था, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। 
: 17 अगस्त को PHQ ने डीआईजी गढ़वाल को पत्र भेजकर कहा कि पीड़ित शिक्षिका का एक और पत्र शासन के माध्यम से प्राप्त हुआ है, इससे पहले ही एडीजी लॉ एंड आर्डर की तरफ से आपको पत्र भेजकर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा था, जिसमे पूर्व डीजीपी पर महिला का यौन शोषण करने, मृत्यु का भय दिखाकर धमकाने और धोखाधड़ी करने का आरोप है, लेकिन आपने अभी तक किसी तरह की करवाई नहीं की है। जो खेदजनक है। 
: 24 अगस्त को अपर सचिव गृह ने डीजीपी को पत्र लिख कर पीड़ित शिक्षिका ने 05.06.2017 को प्रधानमंत्री को पूर्व डीजीपी के खिलाफ यौन शोषण और जान से मरने की धमकी की शिकायत की थी उस पर कार्रवाई के लिए 28 जुलाई और 08 अगस्त को पत्र भेजकर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था, लेकिन अभी तक किसी भी तरह की कार्रवाई से शासन को अवगत नहीं कराया गया है, तत्काल कार्रवाई कर अवगत कराये। 
: 28 अगस्त को PHQ ने डीआईजी गढ़वाल को पत्र भेजकर कहा कि इस मामले में आपको पहले भी 03 जुलाई, 29 जुलाई व 17 अगस्त को पीड़िता के प्रार्थना पत्र पर क़ानूनी कार्रवाई के लिए कहा गया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ, कृपया लौटती डाक से रिपोर्ट भेजें। 
: 16 नवम्बर को शिक्षिका ने अपनी मेल आईडी से डीजीपी को पुन: पुरे सबूतों के साथ शिकायत भेजी और कार्रवाई की मांग की। डीजीपी ने एडीजी लॉ एंड आर्डर ने डीआईजी गढ़वाल को कार्रवाई के लिए लिखा। 
: 17 नवंबर को इसी मेल के क्रम में एडीजी लॉ एंड आर्डर ने डीआईजी गढ़वाल को पीड़ित शिक्षिका की शिकायत की जांच लंबित होने पर नाराजगी जताई और महिला को सुरक्षा देने के निर्देश दिए। यह भी कहा कि जाँच रिपोर्ट शासन को भेजी जनि है इसलिए जल्द पूरी करें। 
: 13 दिसम्बर को एडीजी लॉ एंड आर्डर अशोक कुमार को भेजे पत्र में डीआईजी गढ़वाल पुष्पक ज्योति ने कहा कि जाँच चल रही है। 
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एडीजी अशोक कुमार बोले :—–
इस जाँच के विषय में जब हमारे रिपोर्टर ने सवाल किया तो एडीजी लॉ एंड आर्डर अशोक कुमार बोले कि डीआईजी गढ़वाल जांच कर रहे है। इतना समय क्यों लग रहा है इस पर उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
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डीआईजी गढ़वाल पुष्पक ज्योति का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर 8126770999 व 9456591881 पर संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने फोन पिक नहीं किया। जब उनका पक्ष मिलेगा उसे खबर का हिस्सा बनाया जायेगा। 
 
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हालाँकि पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू से उनका पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर 9411112735 पर संपर्क किया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, मगर इससे पहले सिद्धू मीडिया में शिक्षिका के सभी आरोपों को ख़ारिज कर चुके है। यदि वह और कुछ विस्तार से कहना चाहेंगे तो उनका पक्ष को भी जगह दी जाएगी।
Vision Desk 3
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