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भगवान शिवजी का 5वां अवतार काल भैरव… इनकी पूजा से मिलती है भूत-प्रेत बाधाओं से मुक्ति!

भैरव का अर्थ है मनुष्य को भय रहित करना। भगवान भैरवनाथ मानव के कष्ट का निवारण करते हैं। कहा जाता है कि भैरवनाथ में भगवान विष्ण, महेश और शिवजी की शक्ति है। भैरवनाथ को कई नामों से जाना जाता है। उन्हें भगवान शिवजी का 5वां अवतार कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव को खुश करना बहुत ही आसान है लेकिन अगर काल भैरव नाराज हो जाते हैं तो फिर उन्हें मनाना आसान काम नहीं होता है।

भगवान शिव का रूप

काल भैरव को भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है। शिव जी ने क्रोध में आकर उन्हें जन्म दिया था। इसलिए काल भैरव का स्वरूप विकराल एवं क्रोधी है। काल भैरव के एक हाथ में छड़ी होती हैं और उनका वाहन काला कुत्ता होता है।

तांत्रिक क्रियाओं से मिलती है मुक्ति

काल भैरव को उनके तेज एवं गुस्सैल रूप के लिए जाना जाता है। उन्हें तंत्र का देवता भी माना जाता है। यदि आप काल भैरव की पूजा करते हैं तो आप पर किसी की ओर से की गई तांत्रिक क्रियाएं सफल नहीं होंगी।

शत्रुओं पर मिलती है विजय

यदि आप नियमित तौर पर काल भैरव की पूजा करते हैं या काल भैरव अष्टमी को उनकी आराधना करते हैं तो आपके शत्रु कभी आपको हरा नहीं सकते। उनकी ओर से उत्पन्न की गई बाधाएं अपने आप समाप्त हो जाएंगी। कई बार तो वे आपके मित्र भी बन सकते हैं।

मुकदमों से छुटकारा

काल भैरव की पूजा से कचहरी व मुकदमेबाजी से भी निजात मिलती है। यदि आप सच्चे मन से काल भैरव की पूजा करते हैं तो सालों से चला आ रहा केस जल्द ही निपट जाएगा। यदि विपक्षी दल ने आपके वकील या जज को बरगलाने की कोशिश की तो उसका परिणाम विरोधी के लिए ही नुकसानदायक होगा।

कठिनाइयां होंगी दूर

काल भैरव की आराधना करने से जीवन में कभी कठिनाइयां नहीं आती। बड़ी से बड़ी समस्या भी आसानी से हल हो जाती है। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए आपको पर्याप्त अवसर मिलते हैं और उस पर चल कर आप सफलता को प्राप्त कर सकते हैं। इस पूजन से आपको समाज में प्रतिष्ठा भी मिल सकती है।

मंगल दोष होता है दूर


काल भैरव की पूजा एवं उनके मंत्र के जप से आपकी कुंडली में मौजूद दोष दूर हो सकते हैं। इसमें मुख्यत: मंगल दोष, राहू-केतु दोष एवं काल सर्प दोष शामिल है। यदि भैरव बाबा को कालाष्टमी के दिन काली उड़द व इससे बनी वस्तुए जैसे-इमरती, कचौड़ी, दही बड़े आदि एवं दूध और मेवे से बनी चीजें भोग लगाया जाए तो आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

बीमारी से मिलती मुक्ति

यदि आप लंबे समय से बीमार हैं या बहुत इलाज के बाद भी आप अस्वस्थ हैं तो आप काल भैरव की पूजा करें। चूंकि वे तंत्र के देवता है इसलिए उन्हें शराब का भी प्रसाद चढ़ाया जाता है। निष्ठा से भैरव बाबा की पूजा करने से जल्द ही आपकी बीमारी ठीक हो जाएगी।

हर महीने होती है कालाष्टमी

कालाष्टमी हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पड़ती है। मगर कार्तिक माह की कालाष्टमी का सबसे ज्यादा महत्व होता है। यह कार्तिक कृष्ण पक्ष के आठवें दिन पड़ता है। इस दिन को काल भैरव जयंती भी कहते हैं।

हर महीने होती है कालाष्टमी

माना जाता है कि इस दिन काल भैरव सभी पाप करने वाले लोगों को उनके कमार्ें का दंड देते हैं। उनके हाथ में मौजूद डंडे को दंड देने के अस्त्र के रूप में देखा जाता है।

भैरव दर्शन के बिना अधूरी यात्रा

शिव जी के रूप के अतिरिक्त काल भैरव को मां दुर्गा का रक्षक भी माना जाता है। मान्यता है कि देवी दुर्गा के दर्शन के बाद यदि काल भैरव के दर्शन न किए जाए तो तीर्थ यात्रा अधूरी रहती है। इसलिए मां के सबसे पवित्र तीर्थ स्थानों में से एक वैष्णों देवी मंदिर में लौटते समय भैरव बाबा के दर्शन जरूरी होते हैं।

ऐसे हुआ काल भैरव का जन्म

एक बार ब्रम्हा, विष्णु एवं महेश के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। सभी अपनी योग्यता बातने लगे। इसी बीच ब्रम्हा जी ने भगवान शिव को अपशब्द कह दिए, जिससे भोलेनाथ क्रोधित हो गए। उन्होंने अपने गुस्से एक अंश को जन्म दिया जिसे काल भैरव कहा गया। काल भैरव के इस अवतार को डंडाधिपति और महाकालेश्वर के नाम से भी जाना जाता है।

भैरव पर लगा था ब्रम्ह् हत्या का पाप

शिव जी के अंश काल भैरव ने भोलेनाथ के अपमान के चलते ब्रह्मदेव के पांच मुखों में से एक मुख काट दिया। ऐसा करते ही उन्हें ब्रह्म-हत्या का पाप लगा। इसी कारण भैरव जी को काफी समय तक एक भिखारी बनकर रहना पड़ा।

ऐसे करते हैं भैरव पूजा

काल भैरव की पूजा मध्यरात्रि में 12 बजे से की जाती है। इसके बाद दूसरे दिन ब्रम्ह्मूर्त में उठकर स्नान के बाद काल भैरव पर मृतक की भस्म चढ़ाई जाती है। फिर उनकी कथा पढ़ी जाती है। अंत में किसी काले कुत्ते को भोजन देना चाहिए।

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