Homeराज्यउत्तराखण्डगुटबाजी ने निकली यूकेडी की हवा, 4 विधायकों से शून्य पर सिमटी

गुटबाजी ने निकली यूकेडी की हवा, 4 विधायकों से शून्य पर सिमटी

9 नवम्बर सन 2000 को 27-वे राज्य के रूप में उत्तराखण्ड राज्य का गठन हुआ। राज्य गठन के 17 साल पुरे हो चुके हैं इन सत्रह सालों में चार बार विधानसभा चुनाव हुए जिनमें दोनों ही राष्ट्रीय दल कांग्रेस और बीजेपी की बारी-बारी से सरकार बनी। जंहा प्रदेश में क्षेत्रीय दल के रूप में उत्तराखंड क्रांति दल यानि यूकेडी को तीसरे विकल्प माना जा रहा था, ये संभावनाएं हर बार धुंधली होती जा रही है और तीसरा विकल्प किसी सपने सा रह गया है।

राज्य आंदोलन के समय उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने जिस तरह से आंदोलन में बढ़-चढ़ कर अपनी भूमिका निभाई थी उससे लग रहा था कि राज्य बनने के बाद भी वह कांग्रेस और भाजपा का विकल्प बन कर उभरेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, यूपी में जंहा क्षेत्रीय दल बसपा और सपा ने राष्टीय दल भाजपा और कांग्रेस को कड़ी टक्कर देकर सत्ता पर काबिज हुई, लेकिन उत्तराखंड में यूकेडी लोगो की अपेक्षा पर खरी नहीं उतरी है यही कारण रहे है की प्रदेश में यूकेडी का जनाधार लगातार गिरता जा रहा है।

यूकेडी के हाशिय में जाने के भी कारण बताए जा रहे है, साल 2002 में पहले विधानसभा चुनावों में जहां यूकेडी को 4 सीटें मिली थीं, वहीं 2007 के विधानसभा चुनावों में यह तीन सीटों पर सिमट गई. 2012 के चुनावों में इसे सिर्फ़ एक सीट मिली और 2017 आते-आते यह आंकड़ा शून्य हो गया। ऐसा नहीं है कि इन 17 सालों में यूकेडी ने सत्ता का स्वाद न चखा हो, लेकिन जब-जब उसके विधायक सरकार में शामिल हुए,सत्ता के नशे में अपनी पार्टी को ही भूल गए। यूकेडी के दिग्गज नेता दिवाकर भट्ट और ओम गोपाल रावत 2007 में खंडूड़ी सरकार का हिस्सा रहे और फिर इन्होने भाजपा का दामन थाम लिया. प्रीतम सिंह पंवार 2012 में यमुनोत्री से चुनाव जीत कर आए तो उन्होंने पार्टी का साथ छोड़ दिया।

उत्तराखंड की एकमात्र क्षेत्रीय पार्टी यूकेडी का विश्वास इन 17 सालों में जनता पर नहीं बन पाया. जानकारों का यही मानना हैं कि यूकेडी जैसे पार्टी में नेताओं की अति महत्वकांक्षा और आपसी टकराव ने इन्हें कमज़ोर कर दिया। पार्टी का कमजोर होना नेतृत्व की कमी ,फुट और सरकारों में शामिल होना इनकी विफ़लता का कारण बताई जा रही है।  अब इंतजार इस बात का है कि क्या राष्ट्रीय पटल पर बनी नई पार्टियां जैसे आम आदमी पार्टी क्या तीसरा विकल्प बनती है. या फिर भाजपा और कांग्रेस की ही सत्ता एक दूसरे को बदलती रहेगी.

Vision Desk 3
Vision Desk 3http://vision2020news.com/
उत्तराखंड ताज़ा समाचार - Vision 2020 News gives you the Latest News, Breaking News in Hindi.Uttarakhand News, Dehradun News, Latest News, daily news, headlines, sports, entertainment and business from Uttarakhand, India.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular