देहरादून स्थित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD) में दिव्यांग छात्र-छात्राओं का आंदोलन तेज हो गया है। लंबे समय से लंबित मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर संस्थान परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों ने प्रशासनिक भवन में ताला लगाकर अपना विरोध जताया और साफ कर दिया कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
छात्रों की प्रमुख मांगों में संस्थान में स्थायी निदेशक की नियुक्ति, छात्रवृत्ति और आर्थिक सहायता योजना को दोबारा शुरू करना, समेत अन्य मुद्दे शामिल हैं।
कक्षाओं से बाहर निकले छात्र, प्रशासनिक भवन पर प्रदर्शन
लंबित मांगों को लेकर बड़ी संख्या में दृष्टि दिव्यांग छात्र-छात्राएं अपनी कक्षाओं से बाहर निकल आए। प्रदर्शनकारी छात्र प्राचार्य कार्यालय और निदेशक कार्यालय तक पहुंचे और संस्थान प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें रखीं। छात्रों ने प्रशासनिक भवन में ताला लगाकर भी विरोध जताया। उनका कहना है कि उनकी कई समस्याएं लंबे समय से संस्थान के सामने हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखा जा सकता है।
चार साल से स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं
छात्रों के आंदोलन की सबसे प्रमुख वजह संस्थान में स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं होना बताई जा रही है। विद्यार्थियों का दावा है कि करीब चार वर्षों से संस्थान में स्थायी निदेशक नहीं है। छात्रों के मुताबिक, स्थायी नेतृत्व नहीं होने का असर संस्थान की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। कई महत्वपूर्ण फैसले समय पर नहीं हो पा रहे हैं और छात्रों की शिकायतों के समाधान में भी देरी हो रही है। विद्यार्थियों ने मांग की है कि संस्थान में जल्द से जल्द नियमित निदेशक की नियुक्ति की जाए, ताकि प्रशासनिक और शैक्षणिक फैसले स्थायी व्यवस्था के तहत लिए जा सकें।

छात्रवृत्ति और आर्थिक सहायता योजना फिर शुरू करने की मांग
दिव्यांग विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता योजना को दोबारा शुरू करने की मांग भी उठाई है। छात्रों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए इस तरह की सहायता बेहद महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा हासिल करने के दौरान किताबों, डिजिटल संसाधनों और अन्य जरूरी सुविधाओं पर होने वाला खर्च कई विद्यार्थियों के लिए चुनौती बन जाता है। ऐसे में आर्थिक सहायता योजना को दोबारा शुरू किया जाना जरूरी है।
डिस्पेंसरी में कथित दुर्व्यवहार का आरोप
प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने संस्थान की डिस्पेंसरी में कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया है। छात्रों का आरोप है कि इलाज के दौरान उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया।विद्यार्थियों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। छात्रों का कहना है कि दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनशीलता, सम्मान और बेहतर व्यवहार बेहद जरूरी है।
अब छात्रों की मांगों पर कार्रवाई का इंतजार
NIEPVD में छात्रों के आंदोलन ने संस्थान की व्यवस्थाओं और दिव्यांग विद्यार्थियों की लंबित समस्याओं को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। छात्रों ने स्थायी निदेशक की नियुक्ति से लेकर छात्रवृत्ति, डिजिटल संसाधनों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।
अब देखना होगा कि प्रबंधन और संबंधित विभाग छात्रों की इन मांगों पर किस तरह कार्रवाई करते हैं। फिलहाल प्रबंधन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत को अहम माना जा रहा है।
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