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उत्तराखंड आईएएस अधिकारियों में दो-फाड़, प्रोन्नत आईएएस अधिकारी कभी भी कर सकते हैं कामकाज ठप !

देहरादून। उत्तराखंड सरकार जहां भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है, वहीं सरकार के कुछ अधिकारी सरकार की किरकिरी कराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। जिसके कारण प्रोन्नत आईएएस अधिकारियों में भारी नाराजगी है। यह नाराजगी कभी भी विस्फोटक रूप ले सकती है। एक आईएएस अधिकारी जो मुख्यमंत्री के नजदीक बताया जाता है के कारनामों के कारण प्रोन्नत आईएएस अधिकारियों की स्थिति काफी गंभीर हो रही है। चौथे तल पर बैठे उक्त आईएएस अधिकारी के कारण कभी भी कोई बड़ी घटना नौकरशाही के बीच हो सकती है। कुछ अधिकारी लंबी छूट्टी भी ले सकते हैं, जिससे सरकार का भी कामकाज भी प्रभावित हो सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो मुख्यमंत्री विंग के एक अधिकारी के कारण प्रोन्नत आईएएस अधिकारियों में अच्छा-खासा रोष है। उनमें से कई ऐसे अधिकारी है जो लंबी छूट्टी पर जाने का मन बना रहे हैं। सचिवालय में आम चर्चा है कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हरबंस सिंह चुग समेत आधा दर्जन अधिकारी उपेक्षा के कारण लंबी छुट्टी पर जाने का मन बना रहे हैं। ऐसे में कामकाज ठप होने की भी संभावना बन रही है। प्रोन्नत आईएएस अधिकारियों का मानना है कि मुख्यमंत्री विंग का एक अधिकारी लगातार प्रोन्नत आईएएस अधिकारियों पर प्रहार करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता और चाहे-अनचाहे मुख्यमंत्री को गुमराह करने की पूरी कोशिश कर रहा है जिसके उत्तराखंड की नौकरशाही में भारी नाराजगी है।
सूत्रों की माने तो केवल एक अधिकारी के मनमानी के कारण वर्षों से प्रदेश की सेवा कर रहे प्रोन्नत आईएएस अधिकारियों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उन्हें महत्वपूर्ण पदों से हटाकर सीधी भर्ती के आईएएस अधिकारियों को नियुक्त किया जा रहा है जिसके कारण लगातार नाराजगी बढ़ रही है। जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ प्रोन्नत आईएएस अफसर का कहना था कि उन लोगों ने अपनी बात आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह को बता दी है। उन्हें यह भी बता दिया है कि एक सीधी भर्ती का आईएएस अधिकारी लगातार प्रोन्नत आईएएस अधिकारियों का मनोबल तोड़ने का काम कर रहा है, जबकि उन लोगों को प्रदेश की सेवाओं का अच्छा खासा ज्ञान है। उपजिलाधिकारी से लेकर वरिष्ठ पदों तक वे लगातार सरकार की सेवा करते रहे हैं और सरकार के हर व्यवस्था से अपने को संबद्ध पाते थे और लगातार सरकार के सेवा में संलग्न रहे हैं। इसके बावजूद प्रोन्नत होकर आईएएस बनने के बाद उन्हें उपेक्षित करने का षडयंत्र रचा जा रहा है, जिसके कारण स्थिति काफी गंभीर है। प्रोन्नत आईएएस अधिकारी अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव डा. रणवीर सिंह से मिलकर समस्याएं तो बता ही चुके थे। इस संदर्भ में वे अपनी अलग एसोसिएशन बनाने तक का मन बना चुके हैं। आईएएस के अध्यक्ष डॉ. रणवीर सिंह तथा सचिव आनंदवर्धन को जिन प्रोन्नत आईएएस अधिकारियों ने अपनी पीड़ा बताई है उनमें इन्दुधर बौड़ाई, विनोद प्रसाद रतूड़ी, हरीशचन्द्र सेमवाल, बीएस मनराल, विनय शंकर पांडे, जुगल किशोर पंत, रणवीर सिंह चौहान, अतुल कुमार गुप्ता, राम बिलास यादव, कैप्टन एके तिवारी समेत कई अधिकारी शामिल थे।
यदि यही स्थिति रही तो यह लोग कामकाज ठप्प भी कर सकते हैं, जिसका परिणाम आखिरकार सरकार को ही भुगतना पड़ेगा। जानकारों की माने तो उत्तराखंड में सिर्फ दो ही प्रोन्नत आईएएस अधिकारियों को जिलाधिकारी बनाया गया है। आमतौर पर यह स्थिति पांच से लेकर आठ तक होती थी, लेकिन उक्त अधिकारी के कारण प्रोन्नत आईएएस अधिकारियों को महत्व नहीं मिल रहा है जो समस्या का कारण बनता जा रहा है। इस संदर्भ में अधिकारियों के बीच फैली नाराजगी कभी भी किसी बड़ी समस्या का कारण बन सकती है।

 

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