
देहरादून। कैलाश मानसरोवर का नाम सुनते ही हर किसी का मन वहाँ जाने को बेताब हो जाता है। कैलाश पर्वत समुद्र सतह से 22068 फुट ऊँचाई पर तथा हिमालय से उत्तरी क्षेत्र में तिब्बत में स्थित है। चूँकि तिब्बत चीन के अधीन है। कैलाश चीन में आता है। जो चार धर्मों तिब्बती धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिन्दू का आध्यात्मिक केन्द्र है।
कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को चीन सरकार की ओर से एक बड़ा झटका दिया है। चीन ने श्रद्धालुओं को पवित्र मानसरोवर झील में स्नान करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। बताया जा रहा है कि अब चीनी प्रशासन की ओर से बाल्टी में भरकर झील का पानी दिया जा रहा है। चीन सरकार की ओर से कहा गया है कि झील को प्रदूषण से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
कैलाश पर्वत के दर्शन और मानसरोवर झील में स्नान के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु जाते हैं। यहां यात्री पहले कैलाश पर्वत की परिक्रमा करते हैं। इसके बाद पवित्र मानसरोवर में स्नान के बाद यात्री पूजा-अर्चना करते हैं। इस वर्ष से चीन सरकार ने झील में स्नान पर प्रतिबंध लगा दिया है।
कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर लौटे कई श्रद्धालुओं का कहना है कि पिछली बार जब वे यात्रा पर गए थे तो उन्होंने झील में डुबकी लगाई थी लेकिन इस बार उन्हें झील में नहाने के बजाय बाल्टी में पानी भरकर दिया गया। कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वालों को चीन सरकार की ओर से पहले ही हिदायत दी जाती है लेकिन इसके बावजूद कई यात्री पवित्र सरोवर में साबुन लगाकर नहाते हैं और अपने पुराने कपड़े तक वहीं छोड़ देते हैं। ऐसे में झील को प्रदूषण से बचाने के लिए चीन सरकार ने झील में नहाने पर ही प्रतिबंध लगा दिया है।
कैलास मानसरोवर झील में अब श्रद्धालु नहीं लगा पाएंगे डुबकी, चीन ने लगाया प्रतिबंध!
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