गत दिनों नागपुर में हुई बैठक में भारतीय मजदुर संघ स्वदेशी जागरण मंच किसान संघ व् लघु उद्योग भारती के कड़े रुख को देखते हुए मोदी सरकार ने फैसला किया है की वे आगे से ाऊक आधारित विकास का रास्ता छोड़ देंगे। ऐसा इखढ के चाणक्य अमितशाह की पहल पर हुआ। दरअसल अमितशाह 2019 के चुनावों हेतु कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहते। जबकि इन संगठनो ने यह बात पूरी तरह स्पष्ट कर दी थी की यदि हमारा साथ चाहते हो तो ाऊक का बेकार मोह छोड़ना पड़ेगा। मंच के एक अधिकारी जो दिल्ली से सम्बद्ध है व मिडिया में अक्सर छाए रहते हैं,ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया की फेसबुक को तो डाटा लीक करने के आरोप में नोटिस जारी कर ही दिया है, शीघ्र ही पेप्सिकोला कोकाकोला की भी शामत आएगी। बाकि भी बहुराष्ट्रीय कंपनियो को सबक सिखाने का फैसला हुआ है। पता चला है की अरुण जेटली जी इस फैसले से खुश तो नहीं है पर कर्नाटक के तुरंत होने वाले चुनावों के मद्देनजर उन्हें भी चुप रहने का संकेत हाई कमान ने कर दिया है। इसी अधिकारी ने बताया हम कभी भी डरते नहीं। मेरी जान भी चली जाये तो भी इन बहुराष्ट्रीय कंपनियो को छोडुंगा नहीं। इस सरकार को मेरी बात माननी ही पड़ेगी। यह भी पता चला है की मोदी ने संकेत कर दिया है की कम से कम 2019 तक फङ पुरम कार्यालय की सब बात मानते चलो….।
और मोदी सरकार को झुकना ही पड़ा
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