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उत्तराखंड: बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि इस दिन होगी तय, होगा भव्य अनुष्ठान l

बदरीनाथ चमोली : उत्तराखंड स्थित विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि आगामी 2 अक्टूबर, विजयादशमी (दशहरे) के दिन तय की जाएगी। इस अवसर पर बदरीनाथ मंदिर परिसर में एक भव्य धार्मिक समारोह का आयोजन होगा, जिसमें धर्माधिकारी, वैदिक विद्वान और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के पदाधिकारी सम्मिलित होंगे।

समिति के अनुसार, पंचांग गणना के आधार पर कपाट बंद होने की तिथि का निर्धारण किया जाएगा। इसके पश्चात रावल द्वारा मंदिर बंदी की तिथि की औपचारिक घोषणा की जाएगी। इस परंपरा का धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व है, जिसे हर वर्ष शरद ऋतु में आयोजित किया जाता है।

चारधाम यात्रा के दूसरे चरण ने पकड़ी रफ्तार

चारधाम यात्रा का दूसरा चरण 6 सितंबर से शुरू हो चुका है। बारिश कम होते ही श्रद्धालु बड़ी संख्या में यात्रा के लिए निकल पड़े हैं। 15 सितंबर से केदारनाथ धाम की हेली सेवा भी शुरू कर दी गई है। हालांकि इस वर्ष लगातार हुई भारी बारिश के चलते प्रशासन को कई बार यात्रा रोकनी भी पड़ी थी।

अब मानसून की विदाई के साथ प्रशासन को राहत मिली है और श्रद्धालु बिना किसी बड़ी बाधा के दर्शन कर पा रहे हैं।

45 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए अब तक दर्शन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 26 सितंबर 2025 तक चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा पर 45 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। यह आँकड़ा पिछले वर्ष के करीब पहुंचता दिखाई दे रहा है, जब लगभग 48 लाख श्रद्धालु आए थे।

अब तक के दर्शनार्थी (26 सितंबर तक):
  • केदारनाथ धाम: 15,73,796 श्रद्धालु
  • बदरीनाथ धाम: 13,93,317 श्रद्धालु
  • गंगोत्री धाम: 6,95,113 श्रद्धालु
  • यमुनोत्री धाम: 5,99,507 श्रद्धालु
  • हेमकुंड साहिब: प्रतिदिन औसतन 13,000 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

संभावना है कि आने वाले एक महीने में यह आंकड़ा 50 लाख पार कर जाए, जिससे यह यात्रा सीजन अब तक का सबसे सफल चारधाम यात्रा सीजन बन सकता है।

कपाट बंदी के बाद श्रद्धालु कैसे करेंगे दर्शन?
कपाट बंद होने के बाद बदरीनाथ सहित अन्य धामों में शीतकालीन पूजा और दर्शन की परंपरा गढ़वाल क्षेत्र के अन्य मंदिरों में निभाई जाती है। बदरीनाथ की शीतकालीन गद्दी जोशीमठ (नरसिंह मंदिर) में विराजमान होती है, जहां भक्त दर्शन कर सकते हैं।
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