देहरादून- रामपुर तिराहा कांड की 25वीं बरसी पर एक बार फिर राज्य के शहीदों का संघर्ष और कुर्बानी याद की जा रही है। अलग राज्य की मांग को लेकर पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों ने आंदोलन शुरू किया था। इसके लिए 01 अक्टूबर 1994 की रात को दिल्ली की ओर कूच कर रहे सैकड़ों आंदोलनकारियों को तत्कालीन मुलायम सिंह यादव की सरकार में प्रशासन ने रामपुर तिराहा पर रोक लिया था। आंदोलनकारियों पर बर्बरता की गई। सात आंदोलनकारियों की मौत हो गयी, जबकि 17 घायल हुए थे। इस दौरान लापता हुए तीन लोगों को भी शहीद का दर्जा दिया गया। पुलिसकर्मियों पर महिलाओं से दुष्कर्म के आरोप भी लगे। मामले को लेकर कई केस न्यायालय में विचाराधीन हैं। रामपुर तिराहे पर शहीदों की याद में स्मारक बनाया गया। यहां हर वर्ष दो अक्टूबर को श्रद्धांजलि कार्यक्रम होता है।
क्या हुआ था 2 अक्तूबर, 1994 को
1. एक अक्टूबर 1994 की रात से दो अक्टूबर की सुबह तक आंदोलनकारियों पर पुलिस का लाठीचार्ज और गोलियां बरसीं।
2. पुलिस ने करीब चार सौ उत्तराखंडी गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेज दिए।
3. गांधी जयंती पर सुबह पुलिस की फायरिंग में सात आंदोलनकारियों की मौत हुई।
4. पुलिस ने लाठीचार्ज और फायरिंग के दौरान खेतों में भाग रही महिलाओं की अस्मत से खिलवाड़ किया। सीबीआई ने जांच में इस बात की पुष्टि हुई। ऐसे दो मामले कोर्ट में चल रहे हैं।