देहरादून: उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने AIIMS ऋषिकेश को लेकर अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने हरिद्वार जिला उपभोक्ता आयोग के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें एक व्यक्ति के मेडिकल रिकॉर्ड में बिना मान्य HIV परीक्षण के उसे HIV पॉजिटिव दर्ज करने के मामले में AIIMS ऋषिकेश पर 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। AIIMS की अपील को आयोग ने खारिज कर दिया है।
आयोग के आदेश के मुताबिक, 60 हजार रुपये की राशि में 50 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च शामिल हैं।
बिना जांच मेडिकल रिकॉर्ड में HIV पॉजिटिव दर्ज करने का आरोप
मामला जुलाई 2014 का है। मरीज की तबीयत 12 जुलाई 2014 को खराब हुई थी। 15 जुलाई को चिकित्सकीय परामर्श के बाद उसे उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर किया गया, जिसके बाद मरीज AIIMS ऋषिकेश में भर्ती हुआ।
आरोप है कि 16 जुलाई को अस्पताल से छुट्टी के दौरान उसके मेडिकल रिकॉर्ड और डिस्चार्ज सारांश में उसे HIV पॉजिटिव दर्ज कर दिया गया।
इसके बाद मरीज ने देहरादून के श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज और श्री महंत इंद्रेश अस्पताल में HIV की जांच कराई। दोनों अस्पतालों की रिपोर्ट में मरीज को HIV निगेटिव पाया गया।

AIIMS ने क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान AIIMS की ओर से दलील दी गई कि उस समय संस्थान में HIV जांच के लिए Integrated Counselling and Testing Centre (ICTC) उपलब्ध नहीं था। इसलिए संस्थान ने न तो HIV परीक्षण किया और न ही संबंधित व्यक्ति को आधिकारिक तौर पर HIV पॉजिटिव घोषित किया।
हालांकि, राज्य उपभोक्ता आयोग ने AIIMS की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने संस्थान के अपने मेडिकल रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण माना, जिसमें डिस्चार्ज सारांश और उपचार से संबंधित रिकॉर्ड में मरीज को HIV पॉजिटिव लिखा गया था।
आयोग ने माना गंभीर लापरवाही
आयोग की अध्यक्ष कुमकुम रानी और सदस्य सीएम सिंह ने 17 अगस्त को जारी आदेश में कहा कि HIV एक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति है और इसके निदान में अत्यधिक सावधानी के साथ निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन किया जाना जरूरी है।
आयोग ने माना कि AIIMS यह साबित नहीं कर सका कि मेडिकल रिकॉर्ड में दर्ज HIV पॉजिटिव निष्कर्ष किसी मान्य जांच या निर्धारित प्रोटोकॉल के आधार पर निकाला गया था।
आयोग ने बिना सहायक नैदानिक प्रमाण के किसी व्यक्ति को आधिकारिक मेडिकल रिकॉर्ड में HIV पॉजिटिव दर्ज करने को गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही माना।

मरीज को मानसिक और सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ा
आयोग ने यह भी माना कि HIV जैसी गंभीर बीमारी का गलत तरीके से मेडिकल रिकॉर्ड में दर्ज होना संबंधित व्यक्ति के लिए मानसिक पीड़ा के साथ-साथ सामाजिक कलंक और भावनात्मक परेशानी का कारण बन सकता है।
इसी आधार पर हरिद्वार जिला उपभोक्ता आयोग ने 22 अप्रैल 2019 को AIIMS को 50 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया था।
अब उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता आयोग ने AIIMS की अपील खारिज करते हुए जिला आयोग के इस फैसले को बरकरार रखा है।
AIIMS ऋषिकेश को देना होगा 60 हजार रुपये
राज्य आयोग के फैसले के बाद AIIMS ऋषिकेश पर लगाया गया कुल 60 हजार रुपये का जुर्माना बरकरार है। इसमें 50 हजार रुपये प्रभावित व्यक्ति को मुआवजे के तौर पर और 10 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में देने होंगे।
यह फैसला मेडिकल रिकॉर्ड में गंभीर बीमारियों से संबंधित जानकारी दर्ज करते समय सही जांच, चिकित्सकीय प्रमाण और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।