देहरादून- टिहरी झील में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ढाई करोड़ की लागत से तैयार कराए गए फ्लोटिंग मरीना (झील में तैरता रेस्तरां) के झील में डूबने के कारणों की मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने इस सिलसिले में जिलाधिकारी टिहरी और गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के प्रबंध निदेशक को जांच कर विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने को कहा है। पर्यटन विभाग ने 40 किलोमीटर में फैली टिहरी झील में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से साल 2015 में फ्लोटिंग मरीना तैयार कराया था। विभाग ने इसके संचालन को कई मर्तबा टेंडर भी निकाले, मगर इस तैरते रेस्तरां का संचालन शुरू नहीं हो पाया। इस बीच उपेक्षित पड़े फ्लोटिंग मरीना का आधा हिस्सा सोमवार को झील में डूब गया। इससे विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। इस मामले को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने फ्लोटिंग मरीना के डूबने के कारणों की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारी टिहरी और गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक को इसकी विस्तृत जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटना न हो, इसके लिए प्रभावी प्रबंध करने को कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उधर, पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि डीएम टिहरी को निर्देश दिए गए हैं कि इस प्रकरण की जांच में सर्वेयर की मदद भी लें। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद प्रकरण में आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।