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रक्षाबंधन का यह है शुभ मुर्हूत, रक्षाबंधन पर्व से जुडे़ यह तथ्य आप भी नहीं जानते होगें, पढ़ियें और शेयर कीजिए…….

भाई-बहन के स्नेह और प्रेम का पर्व रक्षाबंधन सावन मास के अंतिम दिन मनाया जाता है। इस साल यह त्यौहार 26 अगस्त को मनाया जायेगा। रक्षाबंधन का यह पावन त्यौहार शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार इसका शुभ काल प्रातः काल 5.00 बज कर 26 मिनट पर प्रारंभ होगा। 12 बजकर 35 मिनट तक धनिष्ठा नक्षत्र अतिगंड योग में रक्षाबंधन मनाया जाएगा। ये मुहूर्त पंचककारक हैं अतरू इस बार की राखी पंचककाल में ही बांध जायेगी। इस दिन बहन, भाई को और पंडित, जजमान को और प्रजा अपने राजा को रक्षा सूत्र बांधकर रक्षा का आश्वासन चाहते हैं। द्वापर युग में द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण की कलाई में साड़ी के पल्लू का एक अंश बांधा था और वही उनकी कौरवों से लाज बचाने का माध्यम बना था। कहते हैं कि उसी घटना के प्रतीक स्वरूप तब से अब तक रक्षाबंधन मनाया जाता है। रक्षाबंधन का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व भी है। रक्षाबंधन के दिन प्रातः काल विधिपूर्वक स्नान करने पश्चात पीला कपड़ा, सूत्र व पीली सरसों, केसर, चंदन, अक्षत, सोने का तार का टुकड़ा एवं दूर्वा बांधे और कलश में रख कर रक्षा सूत्र का पूजन करें बहन अपने भाई को रक्षासूत्र अपने इष्टदेव के सामने बांधे। भक्त अपने भगवान को, जिनके पास कोई वाहन है तो वह उसे, छात्र अपनी पुस्तक और लेखनी, कर्मचारी अपने अपनी रोजी के माघ्यम, ग्वाल अपनी गौशाला की दीवार, व्यापारी अपने व्यापार स्थल और तकनीशियन को अपनी मशीन पर रक्षा सूत्र में बांध सकते है।

 

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