
स्थानीय लोगो की मानें तो कैलाश पर्वत के पास स्थित राक्षसताल और गौरीकुंड में स्नान नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि रावण ने इस ताल में डुबकी लगाईं थी और उसके मन पर बुरा असर हुआ था।
गौरीकुंड पार्वती के स्नान की निजी जगह है। ज्योतिष के अनुसार पार्वती आज भी वहां रोज आकर स्नान करती हैं। ऐसे में किसी को वहां जाना या नहाना नहीं चाहिए, क्योंकि यह पार्वती की निजी जगह है। चाहे स्त्री हों या पुरुष, वहां जाने से सभी को बचना चाहिए।

प्राचीन काल से ही परंपरा रही है, उस समय लोगों को रोकने के लिए कोई अवरोध जैसी चीज नहीं हुआ करती थी। यहां तक कि कुछ दशक पहले तक समाज में यह व्यवस्था थी – गांवों में सुबह ऐलान हो जाता था कि गांव की औरतें गांव के तालाब, झरने या नदी पर नहाने जा रही हैं। इस ऐलान का मतलब होता था कि कोई भी पुरुष उस समय वहां नहीं जाएगा। उन दिनों महिलाओं के नहाने के लिए गुसलखाने, दरवाजे या चारदीवारी की आड़ जैसी चीजें नहीं हुआ करती थीं।
यही तो संस्कृति कहलाती है ‘चूंकि पार्वती वहां नहाती हैं, इसलिस हमें वहां नहीं जाना चाहिए।’
रावण ने नहाकर अपने होश खो दिए थे:- लोगो को मानना है कि इसमें डुबकी लगाने से रावण ने अपने होश खो दिए थे।
जबकि रावण एक बहुत बड़ा भक्त, बतौर राजा एक महान प्रशासक और बेहद प्रतिभाशाली इंसान था। वह शिव की आराधना करने कैलाश पर गया था। शिव के पास जाने से पहले रावण नहाना चाहता था, इसलिए उसने राक्षस ताल में डुबकी मार ली। नहाकर जब शिव से मिलने चला तो रास्ते में उसकी नजर पार्वती पर पड़ी। शिव के पास पहुंच कर रावण नें उनकी स्तुति की। उसकी इस भक्ति से शिव बहुत प्रसन्न हुए। प्रसन्न होकर उन्होंने रावण से कहा कि ‘अच्छा बताओ तुम्हें क्या चाहिए?’इस पर उस मूर्ख ने कहा, ‘मुझे आपकी पत्नी चाहिए।’

कथाओं की मानें तो उसकी बुद्धि इसलिए फिर गई, क्योंकि उसने राक्षसताल में डुबकी मारी थी। उस ताल में नहाने से उसके दिमाग में ऐसे गलत विचार आए। वहीं वैज्ञानिक मत है कि इसके पानी में कुछ खास तरह की प्राकृतकि गैसें मिली हुई हैं, जो पानी को थोड़ा जहरीला सा बनाती हैं। हो सकता है कि इसके पानी से आप मरें नहीं, लेकिन इसका आप पर कुछ नकारात्मक असर हो सकता है। इसलिए जो लोग संवेदनशील हैं उनका कहना है कि यह ताल नहाने के लिए ठीक नहीं है।
