Thursday, February 26, 2026
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17 सालो बाद भी कई चुनौतियां खड़ी है उत्तराखंड पुलिस के सामने?

उत्तराखंड राज्य को बने 17 साल हो चुके है, राज्य सरकार हो या उत्तराखंड पुलिस की स्थापना दिवस को धूमधाम से मानने के लिए तैयारी में जुटी हुई है।  आखिर 17 सालों में उत्तराखंड पुलिस ने कई मोर्चे पर बेहतर काम किया तो कई मसलों में उत्तराखंड पुलिस आज भी यूपी पुलिस की छवि से आगे नहीं निकल पा रही है। 9 नवम्बर 2000 को उत्तराखंड राज्य की स्थापना हुई उस वक्त प्रदेश में कुल 95 थानें थे. जबकि 17 सालों में अब प्रदेश में थानों की संख्या 156 हो गई है. राज्य स्थापना के दौरान जहां पुलिस  महकमे में 12 हजार पुलिस जवान थे. वही अब यह संख्या 27 हजार हो गई है। इस तरह से प्रदेश में पुलिस जवानों की संख्या 17 सालों में दोगुना से अधिक हो गई है. दूसरी तरफ पुलिस चौकियां की संख्या अब 233  हो गई है,  इस तरह से जहां  प्रदेश में 9 नवम्बर 2000  को 43 आईपीएस अधिकारी थे वही यह आईपीएस अधिकारियों का कैडर बढ़कर 73 हो गया है। एडीजी प्रशासन राम सिंह मीणा का कहना है कि प्रदेश में लगातार पुलिस जवानों की संख्या बढ़ती जा रही है प्रदेश में महिला पुलिस कर्मियों की संख्या करीब 10  परसेंट  होने जा रही है लगातार प्रदेश में पुलिस जवानों की भर्ती की जा रही है आईआरबी, पीएसी और सिविल पुलिस में महिला पुलिस कर्मियों की तादाद को बढाने का काम किया जा रहा है।

पुलिस मुख्यालय का कहना है कि प्रदेश में माओवदियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने की कोशिश की गई जिसमें सफलता भी ,चाहे प्रशांत राही हो देवेन्द्र सिंह चमियाल जैसे माओवदी जेल के सलाखों के पीछे भेजे जा चुके हैं.  पुलिस ने SDRF जैसे विंग का गठन किया जिसके कार्यों की सराहना भी हो रही है. मगर उत्तराखंड पुलिस कई मोर्चो पर फेल भी रही है जैसे अमित ऊर्फ भूरा जैसे बदमाश पुलिस की कस्टडी से फरार होने में कामयाब रहे हैं CBCID में आज करीब 56 मामले लंबित चल रहे हैं पुलिस बदमाशों के बीच अपना इकबाद बनाने में कामयाब नहीं हो सकें .यूपी , बिहार, दिल्ली पंजाब जैसे राज्यों के बदमाशों के लिए उत्तराखंड एक सॉफ्ट गारगेट बना हुआ है जहां बदमाश अक्सर पनाह लेते हैं प्रदेश में वन्य जीवों की तस्करी , अवैध शराब , खनन , और जमानों की खरीद फरोख्त के मामलों के निपटारे में नाकाम रही है  फिलहाल अभी भी उत्तराखंड पुलिस के सामने कई चुनौतियां महुं फैलाये खड़ी है , अब देखना होगा उत्तराखंड पुलिस अपनी छवि को कैसे सुधारती है।

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