मान्यता है कि पंचक में कोई भी शुभ कार्य यानि की विवाह,ग्रह प्रवेश,पूजा-पाठ आदि नहीं करना चाहिए। भारतीय ज्योतिष में पंचक को अशुभ माना गया है। पंचक के दौरान कुछ खास काम करना अच्छा नहीं माना गया है। 4 सितंबर की रात 11 बजकर 55 मिनट से पंचक शुरू हो चुका है, जो 9 सितंबर तक रहेगा। सोमवार को शुरू होने की वजह से इसे राज पंचक कहते है। पंचक की गणना चन्द्रमा की स्थिति पर निर्भर रहती है। इस दौरान कोई भी शुभ कामों को करने की मनाही होती है जिसे हमें भूल कर भी नहीं करना चाहिए।
पंचक के कई प्रकार
ज्योतिषाशास्त्रियों के अनुसार पंचक पांच दिनों तक होता है जो वर्ष में कई बार आता है। अगर पंचक का प्रारंभ रविवार से हो रहा होता है तो उसे रोग पंचक कहा जाता है। सोमवार से शुरू हुआ पंचक राज पंचक कहलाता है।
मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। इन पांच दिनों में कोर्ट कचहरी और विवाद आदि के फैसले, अपना हक लेने वाले काम कर सकते हैं। इस पंचक में अग्नि का भय होता है। इस पंचक में किसी भी तरह का निर्माण कार्य, औजार और मशीनरी कामों की शुरुआत करना अशुभ माना गया है।
शनिवार को शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है। यह पंचक मृत्यु के बराबर परेशानी देने वाला होता है। इन पांच दिनों में किसी भी तरह के जोखिम भरे काम नहीं करना चाहिए। इसके प्रभाव से विवाद, चोट, दुर्घटना आदि होने का खतरा रहता है।
ज्योतिषाशास्त्रियों के मुताबिक पंचक में चारपाई बनवाना अच्छा नहीं माना जाता। ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। पंडितों के अनुसार इस पंचक में यात्रा करने की मनाही है। इस पंचक में लेन-देन, व्यापार और किसी भी तरह के सौदे भी नहीं करने चाहिए। ऐसा करने से धन हानि हो सकती है। पंचक में किसी की मृत्यु होने पर शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए।

