घरवालें हमेशा सिखाया करते थे दान करना चाहिए इससे पुन्न मिलेगा, ये बात सच हो या नहीं पर हर मनुष्य को अपनी श्रद्धा और हैसियत के अनुसार कुछ न कुछ दान अवश्य करना चाहिए, पुन्न मिले या कुछ और पर औरो का भला तो हो ही जायेगा। वैसे हमारे शास्त्रों में भी दान को लेकर कई महत्व बताए गए है।

दान उसे ही देना चाहिए, जिसे उसकी आवश्यकता हो। धन-धान्य से संपन्न मनुष्य या दुराचारी मनुष्य को दिया गया दान व्यर्थ माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को दान देने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और दोषों का निवारण भी हो जाता है। शास्त्रों में बताया गया है की किस चीज़ की दान देने का क्या फल होता है।

शास्त्रों के अनुसार, दान देते समय दान देने वाले मनुष्य का मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए और दान लेने वाले का मुंह उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।


वस्त्र- स्वर्ग प्राप्ति के लिए वस्त्रों का दान किया जाना चाहिए।
गुड़- धन-धान्य की प्राप्ति के लिए गुड़ का दान करना चाहिए।
चांदी- अच्छे रूप और सौंदर्य के लिए चांदी का दान किया जाता है।
दीपदान- दीपों का दान करने से नेत्र संबंधी रोग नहीं होते है।
औषधि- जरूरतमंद को औषधि का दान करने से सुख की प्राप्ति होती है।

गाय को घास- गाय को घास दान देने से पापों से मुक्ति मिलती है।
तिल- तिल दान करने से संतान की प्राप्ति होती है।
लोहा- लोहा दान करने से रोगों का नाश होता है।
सोना – सोना दान करने से लम्बी उम्र मिलती है।
भूमि- भूमि दान करने से उत्तम घर की प्राप्ति होती है।
गौ- गाय का दान करने पर सूर्यलोक की प्राप्ति होती है।
घी- घी दान करने से घर में धन-धान्य हमेशा बना रहता है।
कपास- कपास दान करने से सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
नमक- नमक दान करने से कभी अन्न की कमी नहीं होती है।
सप्तधान्य- सात तरह के अनाजों का दान करने से धन-सम्पति मिलती है।
बैल- बैल का दान करने पर सम्पति की प्राप्ति होती है।
वाहन- वाहन का दान करने से अच्छी पत्नी की प्राप्ति होती है।

वही इनमे से कुछ को अष्ट महादान माना जाता है –
तिल, लोहा, सोना, कपास, नमक, सप्तधान्य, भूमि, गाय। किसी भी शुभ प्रसंग या त्योहार पर इनका दान करना सबसे शुभ माना जाता है।

और ये हैं दस महादान-
गाय, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, धान्य, गुड़, चांदी, नमक।

यह दस महादान पितरों के नियमित दिए जाते है।



