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सेनैटरी नैपकीन बनाने वाली कैसे दिखा रही हैं देश को एक नयी दिशा

एक और मिसाल दे रही है राजस्थान के झुंझूनू की महिलाए. सालभर काम आने वाले सेनैटरी नैपकीन बनाकर ना जाने कितनी ही महिलाओं और बच्चियों की मदद कर रही है ये महिलाएं .

इस यूनिट को सिर्फ 8 महिलाओं ने इसी साल फरवरी में शुरू किया है. आपको बता दें कि महिलाओं ने’आनंदी सेनेटरी नैपकीन’ नाम से सेनेटरी नैपकिन बनाने की यूनिट तैयार की है जिसमें सिर्फ महिलाएं ही काम करती है. ये नैपकीन बाजार में मिलने वाले नैपकीन से 6 रुपये कम दाम में मिलती है. जिसकी मार्केटिंग खुद महिलाएं और स्वंय सहायता समूह की महिलाएं भी करती है. इस पर GST भी नहीं लगता.

          

मार्केट में सेनेटरी नैपकीन महंगे मिलने के कारण गरीब महिलाएं इनका इस्तेमाल नहीं कर पाती जिस वजह से खतरनाक बीमारी होने के खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में ये सस्ते नैपकीन महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं.

गांव में सैनेटरी नैपकीन की डिमांड काफी ज्यादा है जिस वजह से वह डिमांड पूरी नहीं कर पा रही है. लेकिन कोशिश जारी है. अमृता फेडरेशन सोसाइटी नाम के समूह का संचालन महिला अधिकारिता विभाग अपनी देखरेख में करवा रहा है.

      

एक पैकेट पर मिलता है 3रु. का कमीशन
15 हजार महिलाएं इस यूनिट से जुड़ चुकीं है. आनंदी सेनेटरी नैपकीन की कीमत 28 रु. है. एक पैकेट में 8 पीस मिलते है. जिसमें महिलाओं को हर पैकेट में 3 रु. कमीशन मिलता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सेनेटरी नैपकीन हर जरूरतमंद महिला के पास पहुंच पाएं इसके लिए जिले में 1593 आंगनहबाड़ी केंद्र पर अमृता कॉर्नर खोले जा रहे है.

वही सेनेटरी नैपकिन बनाने के लिए महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी जाती है और स्कूल कॉलेज में भी ऐसे कॉर्नर खोले जा रहे है.

 

Vision Desk 3
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