Homeराज्यउत्तराखण्डसड़क के अभाव में विकास का थमा पहिया!

सड़क के अभाव में विकास का थमा पहिया!

आजादी के 70 सालों में भले ही हमारे देश ने बड़े-बड़े कीर्तिमान स्थापित कर दिये हो। चन्द्रमा और मंगल जैसे ग्रहों पर जीवन जीने तक की संभावनाएं तालाश कर ली हो मगर उसके उलट उत्तराखण्ड राज्य के गाँवों की बदहाली तस्वीरों में बयां कर रही है। सड़क जैसे आधारभूत सुविधा के कारण आज भी ग्रामीणों को नरकीय जिन्दगी जीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
जनपद रुद्रप्रयाग के विकासखण्ड उखीमठ के ग्राम पंचायत बड़ासू की राजस्व ग्राम तरसाली उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद से ही सड़क की मांग करते आ रहे हैं। 250 की आबादी वाला यह गाँव आज भी रुद्रप्रयाग-गौरीकुण्ड राष्ट्रीय राजमार्ग से 5 किमी. खड़ी और दुर्गम और खतरनाक पहाड़ी चट्टानों और जंगलों के बीच खड़ी चढ़ाई चढ़ने को मजबूर हैं। वर्ष 2013 की आपदा में इस गाँव को जाने वाला पैदल मार्ग भी ध्वस्त हो गया था जो आज तक नहीं बन पाया। जिस कारण पैदल मार्ग भी खतरनाक बन गया है। बीमारों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गो और स्कूली छात्रों के लिए हर रोज भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जबकि तरसाली गाँव कृषि प्रदान गाँव हैं। इस गाँव में सब्जियों और फलों का बेतहासा उत्पादन किया जाता है किन्तु सड़क मार्ग के अभाव में ग्रामीणों की सब्जियां और फल गाँवों में सड़ जाते हैं। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि अगर हमारे गाँव में सड़क होती तो हमें रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता।
उत्तराखण्ड राज्य में चार बार के विधान सभा चुनाव सम्पन्न हो गए हैं। चुनावों के वक्त राजनेता इस गांव की चढ़ाई चढ़कर गाँव को सड़क से जोड़ने का सपना तो जरूर दिखाते हैं लेकिन 18 वर्ष बाद भी गाँव में सड़क बनना तो दूर गाँव के लिए पैदल मार्ग भी न बनवा पाये। उधर ग्रामीणों ने कई बार शासन प्रसाशन से सड़क मार्ग को लेकर पत्राचार किया लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। वर्ष 2015 में तत्कालीन विधायक शैलारानी रावत के द्वारा तरसाली गांव को सड़क से जोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग उखीमठ को प्राकलन तैयार करने के लिए कहा गया था लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते कोई कार्यवाही नहीं हुई। वर्ष 2017 में क्षेत्रीय विधायक मनोज रावत द्वारा पुनः सड़क निर्माण के लिए लोनिवि उखीमठ को प्रस्ताव तैयार कर सड़क का सर्वे करने के निर्देश दिए गए। लोनिवि ने तरसाली गांव के लिए 3 किमी. सड़क का समरेखण व प्रथम स्वीकृति का प्राकलन 20 लाख 54 हजार का प्रस्ताव शासन को भेजा किन्तु शासन ने इस फाईल को 7एमएलए2017 का नाम देकर इस फाईल को न जाने किस कोने में धूल फांक के लिए डाल दिया।
एक ओर जहां उत्तराखण्ड सरकार रोजगार देने और पलायन रोकने की बात करती है वहीं आज भी तरसाली जैसे उत्तराखण्ड सैकड़ों गाँव सड़क स्वास्थ्य शिक्षा जैसे मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। तरसाली गाँव राजनीतिक वोट बैंक के लिए जरूर इस्तेमाल किया जाता है लेकिन सुविधाओं के नाम पर ग्रामीणों को अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है। चार बार के विधासभा और लोक सभा चुनावों में राजनेताओं के झूठे आश्वासनों से छले गए ग्रामीणों ने सड़क निर्माण न होने पर इस बार लोक सभा चुनाव बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। अब देखनी वाली बात ये है कि क्या इन ग्रामीण की फरयाद ‘सबका साथ सबका’ विकास करने वाली सरकार सुन पायेगी।
Vision Desk 3
Vision Desk 3http://vision2020news.com/
उत्तराखंड ताज़ा समाचार - Vision 2020 News gives you the Latest News, Breaking News in Hindi.Uttarakhand News, Dehradun News, Latest News, daily news, headlines, sports, entertainment and business from Uttarakhand, India.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular