उत्तराखंड- जम्मू के पलावाला सेक्टर में अभ्यास सत्र के दौरान हुए एक धमाके में शहीद दस गढ़वाल राइफल के जवान सुरजीत सिंह (30) का शव आज सुबह पैतृक गांव स्यूंण पहुंचा। पूरे सैन्य सम्मान के साथ पैतृक घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। शव को 3 किलोमीटर दूर मेनागाड़ घाट ले जाया गया। शहीद की अंतिम यात्रा में भारी संख्या में लोग पहुंचे। शव के गांव पहुंचने के बाद ग्रामीण शोकग्रस्त हो गए। शहीद की मां और परिवारजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। स्यूंण गांव निवासी सुरजीत सिंह वर्ष 2008 में सेना में शामिल हुए थे।बड़े भाई महावीर राणा के बेटे अजय राणा ने शहीद को मुखाग्नि दी। गढ़वाल राइफल के कर्नल अनिल कुमार पुंडीर, चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया, पूर्व कैविनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी के साथ कई जनप्रतिनिधियों ने घाट पर पहुंच कर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
वहीं जम्मू कश्मीर के राजौरी में माइन ब्लास्ट की चपेट में आने से शहीद हुए अल्मोड़ा के लांस नायक सूरज सिंह का पार्थिव शरीर अल्मोड़ा पहुंच गया है। सेना के विशेष हेलीकॉप्टर से शहीद का पार्थीव शरीर पहले आर्मी ग्राउंड पहुंचा। उसके बाद सेना के वाहन से उसे शहीद के गांव पालड़ी पहुंचाया गया। शहीद को सलामी देने के लिए केंद्रीय कपड़ा मंत्री अजय टम्टा, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री बिट्टू, डीएम नितिन भदौरिया, एसडीएम विवेक रॉय व आर्मी अफसर समेत कई प्रशासनिक अधिकारी आर्मी ग्राउंड पहुंचे। इसके बाद सेना की गाड़ी से पार्थिव शरीर भनोली के पालड़ी गांव पहुंचा। पार्थीव शरीर के गांव पहुंचते ही उनके दर्शन के लिए शहीद के घर के बाहर लोगों का तांता लग गया। शहीद को इस तरह कैफेन में देखकर उनके घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। उनकी मां रोते-रोते बेसुध हो गयी। शहीद के परिजनों ने बताया कि सूरज अपनी बहन को दुल्हन बनते हुए देखना चाहता था। छुट्टी खत्म करके ड्यूटी दोबारा ज्वॉइन करने जाते वक्त सूरज ने घर के बुजुर्गों के पैर छूकर कहा था कि वो आने के बाद बहन की धूमधाम से शादी करेंगा।