Homeराज्यउत्तराखण्डसुसाइट करने के बाद क्या होता है आपकी आत्मा के साथ....?

सुसाइट करने के बाद क्या होता है आपकी आत्मा के साथ….?

कहते है की 84 लाख योनियों को भोगने के बाद इंसानी जीवन मिलता है, यह जीवन सभी योनियों में सबसे शानदार होता है। ऐसे में आत्महत्या कर इस ज़िन्दगी को ख़त्म कर लेना शास्त्रों में पाप माना गया है। आत्महत्या करने का मतलब है अपने संघर्षों से हार मान कर अपनी ज़िन्दगी को समाप्त कर लेना। ऐसे इंसानों के प्रति लोगो की सहानुभूति भी होती है तो कुछ इन्हें कायर और डरपोक मानकर इनका तिरस्कार करते है। जिस घर में आत्महत्या हुई होती है उस घर के लोगों में दोष माना जाता है। आत्महत्या करना कानूनन कानूनन अपराध भी है।                                                                        क्या होता है आत्महत्या के बाद आत्मा का यूँ तो हिन्दू धर्म में लिखा है की आत्महत्या के बाद का जीवन पहले के जीवन की तुलना में ज्यादा कष्टकारी होता है, क्योकि हमारा सिर्फ शरीर मरता है, शरीर के मरने से हमें शारीरिक दुखों से मुक्ति मिल सकती है लेकिन मानसिक तौर पर शांति नहीं मिलती…हर कोई जानना चाहता है कि आत्‍महत्‍या करने वाले को कहां स्‍थान मिलता होगा, स्‍वर्ग में या नर्क में; या फिर उसे कहीं और जाना होता होगा। ऐसे कई सवालों के उत्‍तर हम आपको इस लेख में देने का प्रयास करेंगे,

कहा जाता है कि कई योनियों में जन्‍म-मरण के चक्र को पूरा करने में हजारों साल लग जाते हैं उसके बाद मानव जीवन मिलता है ऐसे में उसे पूरा जीना चाहिए और मानव कल्‍याण हेतू कुछ कर्म करने चाहिए। ऐसा माना जाता हे कि भगवान स्‍वयं प्रत्‍यक्ष रूप से मानव को दर्शन नहीं दे सकते हैं और उनको समझा नहीं सकते हैं इसलिए समय-समय पर उन्‍हें भगवान का रूप लेना पड़ता है। इस प्रकार, समझा जा सकता है कि मानव जीवन कितना महत्‍वपूर्ण होता है।
                                 आत्मा अधर में लटक जाती है

ऐसा माना जाता है कि जो व्‍यक्ति आत्‍महत्‍या करता है उसकी आत्‍मा को शांति नहीं मिलती है और वह हमारे बीच ही भटकती रहती है, न ही उसे स्‍वर्ग/नर्क में जाने को मिलता है न ही वह जीवन में पुन: आ सकती है। ऐसे में आत्‍मा अधर में लटक जाती है, वो तब तक अंतिम स्‍थान पर नहीं जाते हैं जब तक उनका समय नहीं हो जाता है।
ऐसा माना जाता है कि जो व्‍यक्ति आत्‍महत्‍या करता है उसकी आत्‍मा को शांति नहीं मिलती है और वह हमारे बीच ही भटकती रहती है, न ही उसे स्‍वर्ग/नर्क में जाने को मिलता है न ही वह जीवन में पुन: आ सकती है। ऐसे में आत्‍मा अधर में लटक जाती है, वो तब तक अंतिम स्‍थान पर नहीं जाते हैं जब तक उनका समय नहीं हो जाता है।

मान लीजिए, अगर किसी व्‍यक्ति की आयु लगभ 70 वर्ष की है और उसने 30 वर्ष में ही किसी कारणवश जीवनलीला को समाप्‍त कर लिया तो उसकी आत्‍मा 40 वर्षों तक यूं ही भटकती रहेगी। कम्‍मा लोक में भटकने वाली आत्‍मा का कोई ठिकाना नहीं होता, प्रक्रिया अधूरी ही रहती है और समय आने पर ही वह स्‍वर्ग/नर्क जाएगा।

हर व्‍यक्ति प्रकृति के नियमों के अनुसार ही जन्‍म लेता है और उसी के अनुसार उसकी मृत्‍यु होनी चाहिए। बस सभी के जाने का तरीका अलग होता है कोई बीमारी से चला जाता है और कोई वृद्धावस्‍था के बाद। लेकिन आत्‍महत्‍या करने से व्‍यक्ति प्रकृति के खिलाफ कदम उठाता है ऐसे में उसकी आत्‍मा की मुक्ति संभव नहीं हो पाती है।

Vision Desk 3
Vision Desk 3http://vision2020news.com/
उत्तराखंड ताज़ा समाचार - Vision 2020 News gives you the Latest News, Breaking News in Hindi.Uttarakhand News, Dehradun News, Latest News, daily news, headlines, sports, entertainment and business from Uttarakhand, India.
RELATED ARTICLES

8 COMMENTS

  1. Ищешь ключ TF2? tf2 ключи выберите подходящее предложение и оформите покупку за несколько минут. Быстрая доставка, безопасная оплата, удобный интерфейс и актуальная информация о наличии ключей.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular