
उत्तराखंड में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार नही चल पायेगा. जीरो टालरेन्स वाली त्रिवेंदर सरकार ने भ्रष्टाचार के साथ-साथ राजनीतिक गुंडागर्दी पर भी जीरो टालरेन्स की नीति अपना ली है. अब किसी प्रकार की गुंडा गर्दी तथा भ्रष्टाचार सरकार बर्दास्त नही करेगी. चाहे बंदूक से गोली चलाने वाले हो या मुंह से बातों की गोली चलाने वाले हो अथवा ब्लैकमेल करने वाले लोग. अब किसी की भी दाल नही गल रही है. अब तक की सरकारों में ऐसा ही हो रहा था जो अब संभव नहीं है. हल में ही अनुशासन हीनता के मामले में संगठन द्वारा कुवंर प्रणव सिंह चैंपियन की मौखिक बोली पर नोटिस दे दिया गया है. दून विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा बडबोले विधायक कुवंर प्रणव सिंह चैंपियन से मिलना अथवा उनकी बातों पर ध्यान न देना इसी बात का उदहारण है. लगता है मुख्यमंत्री कुवंर प्रणव सिंह चैंपियन के इस तरह के व्यव्हार से काफी नाराज है. त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार की ईमानदारी तथा सरकार की जीरो टालरेन्स नीति से ऐसे लोगों को काफी समस्या है जिनकी इस सरकार में नही चल पा रही है. ऐसे लोग तरह-तरह की अफवाहें फैला कर सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन त्रिवेंद्र सरकार किसी भी कीमत पर इन लोगों को भाव नही दे रही है. इसी कारण ऐसे क्षत्रप काफी नाराज हैं. मुख्यमंत्री जिन्हें केंद्रीय आला कमान का पूरा साथ तथा समर्थन मिला हुआ है वह पूरी तरह संतुष्ट हैं. वे ऐसे लोगों को जरा सा भी भाव नही दे रहे हैं, वो चाहें बाहुबली विधायक हों अथवा प्रभावशाली लोग. सरकार किसी भी कीमत पर ऐसे लोगो को विशेष महत्व नहीं दे रही है जो कही ना कही चाहे अनचाहे सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की इस तरह की आदतों से उन लोगों को काफी तकलीफ़ हो रही है, जो सत्ता का उपयोग अपने तरह से करना चाहते हैं. अब तक भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के कारन ऐसे लोगों को लगातार नीचा देखना पड़ रहा है. दूसरी ओर मुख्यमंत्री मस्ती की चाल से आपना काम पूरा कर रहे है और विकास के कामों को अंजाम दे रहे हैं. यह इस बात का संकेत है कि उन्हें इस प्रकार के भ्रष्टाचार करने वालो का साथ नही चाहिए. वैसे, उत्तराखंड में पार्टी के भीतर तथा पार्टी के बाहर के कुछ लोगों को इस बात की पीड़ा है जिसके कारण वह तरह-तरह अफवाहे उड़ा रहे हैं. कुवर प्रणव सिंह चैंपियन मसले को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है. फ़िलहाल उत्तराखंड सरकार किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग से अपने को बचाते हुए भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार कर रही है. जबकि दूसरी सरकारें ब्लैकमेलिंग से अपने को नही बचा पायीं, लेकिन यह पहली सरकार है जिसने अपने आप को ब्लैकमेलिंग से भी बचाया है और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को नही बख्सा है. जो अपने आप में बेमिसाल है इसका दूरगामी परिणाम प्रदेश को मिलेगा. इसके लिए मुख्यमंत्री और उनकी टीम को बधाई देनी चाहिए. इसके पीछे केंद्रीय आला कमान का भरपूर समर्थन भी है.