
देहरादून। शिक्षा संस्कार की एक धुरी है। लेकिन जब शिक्षा देने वाले गुरुजी ही शिक्षा से जी चुराने लगे तो ऐसे में शिक्षा का क्या भविष्य होगा यह बात सरकार भी जान गई है। अब सरकार ने निर्णय लिया है कि पढ़ाई से बचने वाले गुरुजनों को जबरिया रिटायरमेंट दे दिया जाएगा, प्रतिनियुक्ति बंद कर दी जाएगी तथा आंदोलनकारी शिक्षकों पर कठोर कार्यवाही की जाएगी। शिक्षा विभाग की इस पहल से कामचोर शिक्षकों में हड़कंप है। शिक्षा विभाग ने यह आदेश शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए जारी किया है। शिक्षा में काम न करने वाले शिक्षक प्राय: अपना स्थानान्तरण दूसरे विभाग में करा लेते हैं और लगातार वहीं जम रहते हैं। पहुंच और प्रभाव का लाभ उठाकर शिक्षा से जी चुराते रहते हैं लेकिन अब ऐसे शिक्षकों की खैर नहीं।
ऐसे में शिक्षा विभाग ने अब इस तरह की प्रतिनियुक्ति को ग्रीन सिग्नल देने पर रोक लगा दी है। आंदोलनकारी शिक्षकों पर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।
निदेशालय से आई 7 शिक्षकों की सिफारिश को भी शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने निरस्त कर दिया है। शिक्षा मंत्री का कहना है कि राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में इस प्रकार की संस्तुतियां किसी भी सूरत में न की जाएं। स्कूलों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए शिक्षकों की प्रतिनियुक्त पर लगभग पूरी तरह से रोक रहेगी।
प्रदेश में शिक्षा का नया सत्र शुरू हो चुका है और शिक्षक अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। अब हाईकोर्ट ने हड़ताली शिक्षकों पर सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। शिक्षा मंत्री शिक्षकों को पहले ही इस बात का अश्वासन दे चुके हैं कि सरकार उनकी जायज मांगों को लेकर गंभीर है ऐसे में उन्हें सरकार के खिलाफ नारे लगाने के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए।