
देहरादून। उत्तराखंड क्रिकेट बोर्ड इन दिनों चर्चा में है। आरोप-प्रत्यारोप के बाद वर्षों बाद बने उत्तराखंड क्रिकेट बोर्ड पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जिसके कारण क्रिकेटरों का भविष्य दांव पर लग सकता है। लंबे अर्से बाद क्रिकेट बोर्ड का गठन हुआ जिसे बीसीसीआई से मान्यता मिली। 18 जून 2018 को उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित कमेटी ऑफि एडमिनिस्टेटर्स ने उत्तराखंड क्रिकेट बोर्ड को संबद्धता दी और उत्तराखंड क्रिकेट कंसेसस कमेटी का गठन किया गया। उत्तराखंड की सभी चार प्रमुख क्रिकेट एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों द्वारा पारदर्शिता से इस समिति के संचालन की घोषणा की गई थी। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से बीसीसीआई ने दिव्य नौटियाल को उत्तराखंड क्रिकेट समिति का सदस्य नामित किया है। दिव्य नौटियाल के नाम पर लगातार अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही है। उन पर मैच फिक्सिंग के मामले में सहयोग का आरोप लगा। सीबीआई की रिपोर्ट में दिव्य नौटियाल से भी पूछताछ की गई थी और सीबीआई ने दिव्य नौटियाल को कथित रूप से आरोपी माना। आज दिव्य नौटियाल उत्तराखंड क्रिकेट कमेटी के प्रमुख है। लेकिन उन लगे आरोप कई तरह की चर्चाएं करा रहे हैं। आरोप तो यहां तक है कि दिव्य नौटियाल जो अपेस फाइनेंस गु्रप की छह विभिन्न कंपनियों के निदेशकों में से एक थे। सूत्रों की माने तो उत्तराखंड तथा अन्य कई प्रदेशों से 150 करोड़ रुपये की राशि जमा की और लापता हो गए थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनके विरुद्ध हल्द्वानी, भवाली के पुलिस थानों में 9 अगस्त 1999 में तथा 23 जून 2000 को 420, 406, 471 तथा 7 मार्च 2000 को भी 420 का एक प्रकरण दायर किया गया था। लेकिन इन सारे मामलों में दिव्य नौटियाल मुक्त हो चुके हैं, ऐसा उनका मानना है।
उत्तराखंड की चार एसोसिएशनों उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन जिसमें प्रदीप सिंह चौहान, आर एस चौहान, चंद्रकांत आर्य, महेश सिंह बोरा, क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के रवि वर्मा, मनोज रावत, डॉ. राजेश कुमार तिवारी, माहिम वर्मा, यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन के संजय गुंसाई, अवनीश वर्मा, रोहित चौहान तथा उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के दिव्य नौटियाल, अशोक बार्बी, अंजू तोमर तथा आरएस नौटियाल द्वारा हस्ताक्षर किए गए है। इन चारों एसोसिएशनों के बाद ही इस कमेटी का गठन हुआ है लेकिन अब वर्चस्व की लड़ाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कई निदेशक दिव्य नौटियाल के पक्ष तो कई उनके विरोध में खड़े हो गए हैं और उन पर आरोपों की झड़ी लगा रहे हैं। इसी संदर्भ में (उत्तराखंड़ क्रिकेट एसोसिएशन) के अध्यक्ष राम शरण नौटियाल से बातचीत करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। लेकिंन सूत्रों की माने तों यूसीसीआई के डायरेक्टरों ने इसकी लिखी शिकायत बीसीसीआई से की है।
इस संदर्भ में शनिवार को दूरभाष पर जब दिव्य नौटियाल से चर्चा की गई तो उन्होंने साफ कहा कि अपेस कंपनी के सारे मामलों में सभी विभागों से क्लियरेंस मिल चुकी है। सन् 2000 में कंपनी बंद हो गई थी। उसके सारे प्रकरण भी बंद हो गए हैं। यह सारे आरोप-प्रत्यारोप गलत है। दिव्य नौटियाल का कहना है कि उन्होंने उच्चतम न्यायालय में 18 वर्षों तक क्रिकेट की लड़ाई लड़ी है। उच्च न्यायालय से आदेश है जिसके आधार पर बीसीसीआई ने यहां के चारों संगठनों को मिलाकर मान्यता दी है। ऐसे में सारे आरोप निधार है। मैंने क्रिकेट में क्या किया है इसके लिए हमारे रिकार्ड है जो मैंने लगातार न्यायालय तथा अन्य लोगों को दिया है। दिव्य नौटियाल का कहना है कि उनके खिलाफ सीबीआई की कोई जांच हुई है, यह उनकी जानकारी में नहीं है। उनका कहना है कि ऐसे में आरोप-प्रत्यारोप लगाना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड क्रिकेट कंसेसस कमेटी बीसीसीआई से मान्यता प्राप्त है तथा उत्तराखंड सरकार से भी अनुमन्य है। इस आशय का निर्देश विनोद राय तथा मिसेज डायना एडुल्जी ने जारी किया है।