चमोली जिले में आई आपदा के बाद हर मोर्चे पर महिला अधिकारी डटी हुई है। रैणी से लेकर तपोवन तक के क्षेत्र में बचाव और राहत कार्यों में अलग-अलग मोर्चों पर फ्रंटलाइन में रहकर ये महिला अधिकारी अपने दायित्वों का जिस तरह निर्वहन कर रही हैं, वो कबीले तारीफ है। फिर चाहे वह चमोली की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया हो, गढ़वाल रेंज की डीआईजी नीरू गर्ग हों, ITBP की डीआईजी अपर्णा कुमार हों या फिर SDRF की डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल… विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बिठाने में इन चार महिला अधिकारियों का बड़ा रोल रहा है। यही नहीं इनमे दो महिला अधिकारियों के योगदान को जितनी सराहा की जाए उतनी कम है जो अपने छोटे-छोटे बच्चों को कई दिनों से अकेला छोड़कर फ्रंटफुट पर आकर राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं एक मां के लिए अपने छोटे बच्चों से कई-कई दिन तक अलग रहना आसान काम नहीं है, लेकिन ये महिला अधिकारी इन परिस्थितियों में भी अपनी ड्यूटी का बखूबी निभा रही है। आइए आपका इनसे परिचय कराते हैं……
स्वाति एस.भदौरिया, डीएम चमोली
सात फरवरी को आपदा की जानकारी मिलने के एक घंटे के अंदर चमोली की डीएम स्वाति एस.भदौरिया घटनास्थल पर पहुंच गई थीं। तब से वह चैबीसों घंटे बचाव और राहत कार्यों की मानीटरिग कर रही हैं। साथ ही मौके पर जाकर बचाव और राहत कार्यो को देखने के अलावा प्रभावितों के स्वजनों को भी ढाढस बंधा रही हैं। स्वाति इन दिनों सुबह पांच बजे से लेकर रात दो बजे तक कार्य कर रही हैं। आपदा प्रभावित क्षेत्र तपोवन व रैणी के साथ ही सड़क संपर्क से कटे गावों में सामग्री बांटने में जुट रही हैं तो शासन से लगातार संपर्क कर राहत कार्यों की जानकारी भी दे रही हैं। स्वाति इन दिनों अपने साढ़े तीन साल के बेटे को बिल्कुल समय नहीं दे पाती है।
नीरू गर्ग, डीआइजी गढ़वाल
पुलिस के गढ़वाल रेंज की डीआइजी नीरू गर्ग भी त्रासदी की सूचना के बाद तपोवन पहुंच गई थीं। वह सात फरवरी से पुलिस द्वारा चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्य के संचालन का जिम्मा संभाले हुई हैं। प्रशासन से उनके बेहतर तालमेल का ही नतीजा है कि तपोवन और रैणी में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हुई है। आइपीएस नीरू तपोवन में कैंप कर देर रात तक रेस्क्यू की समीक्षा के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शासन के संपर्क में रहती हैं। नदी किनारे शवों की खोजबीन समेत अन्य कार्यों पर भी वह नजर रखे हुए हैं। रेस्क्यू वाले स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती है, मगर नीरू ने प्रशासन और स्थानीय व्यक्तियों से तालमेल कर इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। नीरू गर्ग अपनी नौ साल की बेटी को हरिद्वार में अपनी मां के पास छोड़कर आयी हुई है जिसे वह कई दिनों से मिली नहीं है।
अपर्णा कुमार, डीआइजी आइटीबीपी
चमोली आपदा में बचाव और राहत कार्यों में आइटीबीपी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में है। रेस्क्यू अभियान की कमान संभाले हैं आइटीबीपी की डीआइजी अपर्णा कुमार। टनल में फंसे 12 लोगों को सकुशल निकालने में भी आइटीबीपी सफल रही। विश्व के सात ऊंचे शिखर फतह करने वाली आइपीएस अपर्णा फ्रंट लाइन में रहकर कार्य कर रही हैं। उनकी अगुआई में आइटीबीपी गाव-गाव जाकर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। गावों में संपर्क के लिए ट्राली लगानी हो, या फिर आपदा प्रभावित गावों में राशन समेत जरूरी सामग्री का वितरण, उनके नेतृत्व में आइटीबीपी अपने फर्ज को बखूबी अंजाम दे रही है।
रिधिम अग्रवाल, डीआइजी एसडीआरएफ
चमोली में चल रहे रेस्क्यू आपरेशन में राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) सबसे अहम भूमिका में है। फ्रंट पर काम कर रही एसडीआरएफ की टीम को देहरादून से बल की डीआइजी एवं राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिधिम अग्रवाल लीड कर रही हैं। वह यहां से विभिन्न एजेंसियों और विभागों से समन्वय स्थापित करने के साथ ही एक्शन प्लान तैयार करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। आपदा की सूचना मिलते ही उन्होंने जोशीमठ व गौचर समेत अन्य स्थानों से एसडीआरएफ की टीमों को तत्काल रवाना किया। यही नहीं, अभियान में संसाधन, तकनीकी सहायता भी वह एनडीएमए के सहयोग से मुहैया करा रही हैं। उच्चाधिकारियों को अपडेट देने के साथ ही समन्वय और अभियान की रणनीति में उनका अहम योगदान है।