
नईदिल्ली: अगर आपको वायग्रा की जरूरत पड़ती है तो आपके लिए खुशखबरी है. जी हां, अब सेक्स का मूड बनाने या सेक्स डिजायर बढ़ाने के लिए वायग्रा नहीं खानी पड़ेगी बल्कि इसकी बजाय चॉकलेट ही काफी होगी.
क्या कहती है रिसर्च-
जी हां, अब ऐसी चॉकलेट आ गई है जो वायग्रा को रिप्लेस कर सकती है. दरअसल, चॉकलेट में एक ऐसा हार्मोन पाया गया है जिसे मेंटल वायग्रा माना जा रहा है. इस हार्मोंन से कपल्स को सेक्स मूड बनाने में आसानी होगी. इस हार्मोंन का नाम है किसपेप्टिन (Kisspeptin), जो कि चॉकलेट में पाया जाता है.
कैसे काम करता है ये हार्मोन-
ये हार्मोन ब्रेन से कनेक्टक होते ही मूड बदलने लगता है. रिसर्च में ये भी कहा गया कि इससे टीनेजर्स ब्वॉयज के बिहेवियर के बारे में पता करने में भी मदद मिलेगी. साथ ही ये भी जानने में मदद मिलेगी कि क्यों पुरुष ही सेक्स और रिलेशनशिप में ज्यादा इंटरेस्टिड होते हैं.
कैसे की गई रिसर्च-
रिसर्च में युवा लड़कों को इस हार्मोन का इंजेक्शन लगाया गया और फिर इनके ब्रेन को स्कैन किया गया. स्कैन के दौरान पाया गया कि ब्रेन के एक हिस्से में रोमांस और सेक्सुअल एरॉजल जैसी एक्टिविटीज सक्रिय हो गई हैं. इसका मतलब है कि इस इंजेक्शन के जरिए उन लोगों की मदद की जा सकती है जो फैमिली स्टार्ट करने की प्लानिंग कर रहे हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट-
लंदन, इंपीरियल कॉलेज के प्रोफेसर वलजीत ढिल्लो, जो कि इस रिसर्च को लीड कर रहे थे, का कहना है कि हमारी रिसर्च काफी एक्साइटिंग हैं जो कि ये इंडीकेट करती है कि किसपेप्टिन हार्मोंन सेक्स और रीप्रोडक्शन में मदद करता है. अगर किसपेप्टिन सचमुच साइकोसेक्सुअल डिस्ऑर्डर का इफेक्टिव तरीके से ट्रीटमेंट करने में सक्षम है तो ये उन अनगिनत कपल्स के लिए खुशखबरी है जो कि पेरेंट्स नहीं बन पा रहे.
पुरुषों को अधिक होती है सेक्सुअल प्रॉब्लम-
आपको बता दें, यूके के 10 में से एक पुरुष को सेक्सुअल प्रॉब्लम होती है. कई लोगों को रिलेशनशिप इश्यूज, स्ट्रे्स और एंजाइटी के कारण सेक्स इच्छा में कमी की शिकायत है.
इन्फिर्टिलिटी का ट्रीटमेंट-
डॉ. ढिल्लो का कहना है कि इन्फिर्टिलिटी के लिए बहुत सी रिसर्च और ट्रीटमेंट मैथड का फोकस बायलोजिकल फैक्टर्स पर होता है. ऐसे में कपल्स को नैचुरली कंसीव करना और भी डिफिकल्ट होता है. बेशक ये ट्रीटमेंट मैथड रीप्रोडक्शन में अहम भूमिका निभाते हैं लेकिन इन्फिर्टिलिटी के ट्रीटमेंट में ब्रेन और इमोशनल प्रोसेस का भी अहम भूमिका होती है.
इसमें कोई शक नहीं कि किसपेप्टिन रिप्रोडक्टिव हार्मोंन रिलीज करके शुरूआत में प्यूबर्टी में अहम भूमिका निभाता है.
रिसर्च के नतीजे-
रिसर्च के नतीजों में पाया गया कि किसपेप्टिन हार्मोन सेक्सुअल और रोमांटिक एक्टिविटीज को ब्रेन में बूस्ट करता है. साथ ही इससे नेगेटिव मूड भी खत्म होता है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि किसपेप्टिन हार्मोन से साइकोसेक्सुअल डिस्ऑर्डर और डिप्रेशन का इलाज करने में मदद मिलेगी. लेकिन अभी इस पर और रिसर्च होनी बाकी है.
