
देहरादून। उत्तराखंड के क्रिकेट खिलाड़ियों के चयन में भेदभादव किया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी बीसीसीआई द्वारा गठित कान्सेसस कमेटी है जो नियम विरूद्व ट्रायल व उत्तराखण्ड के विभिन्न जिलों के क्रिकेट खिलाड़ियों का शोषण कर रही है। इसका कारण महंगी संस्थान में प्रशिक्षण तथा पंजीकरण कराने की कार्यवाही है।
सोमवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों को जानकारी देते हुए पुरोहित क्रिकेट एकेडमी मथुरावाला के संचालकों ने बताया कि कान्सेस कमेटी पूरी तरह शोषण कर रही है जो उचित नहीं है। संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि चारों एसोसिएशन से ट्रायल के लिए 100 नामों का चयन किया गया। जबकि ट्रायल ओपन होना चाहिए जैसा कि राजस्थान में गठित बीसीसीआई द्वारा किया गया है। राजस्थान में पारदर्शिता कायम रखने के लिए ओपन ट्रायल हुए वहीं इसके विपरीत उत्तराखण्ड में 100 खिलाड़ियों का चयन बिना किसी आधार के कर दिया। इन लोगों का कहना है कि उत्तराखण्ड में दो अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट ग्रांउड होने के बावजूद ट्रायल ऐसी प्राईवेट एकेडमी में लिये जा रहे है जिसकी प्रतिमाह फीस 30 हजार व रजिस्ट्रेशन फीस 1-5 लाख रूपये है। जो इस बात को दर्शाने के लिए काफी है कि उत्तराखण्ड में गरीब खिलाड़ी को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलेगा। उत्तराखंड का कोई भी खिलाड़ी इतनी महंगी फीस नहीं भर पाएगा। पत्रकारों से वार्ता करते हुए पुरोहित क्रिकेट एकेडमी के संचालकों ने और कई गंभीर आरोप लगाए।
क्रिकेट खिलाड़ियों का हो रहा है शोषण
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