
महिलाओं में पीरियड्स एक आम समस्या है. कहा जाता है कि पीरियड्स का न होना प्रेगनेंसी की ओर संकेत करता है. लेकिन इसके कारण और भी हो सकते हैं. ऐसी बहुत सी महिलाएं होती हैं जो पीरियड के न आने, देरी से आने या फिर बंद होने पर ये सोचकर परेशान हो जाती हैं कि कहीं वो प्रेग्नेंट तो नहीं हैं. इसके बारे में कुछ बातें जननी जरुरी है.
आइये आपको बताते हैं इसके पीछे कौन-कौन हैं…..
1. तनाव की वजह से-
स्ट्रेस या कहें की तनाव हमारे शारीरिक के स्वास्थ्य को कई तरीकों से प्रभावित करता है. पीरियड्स में देरी होना भी उन्ही कारणों में से है. तनाव अंडोत्सर्ग के लिए जिम्मेदार हार्मोन जीएनआरएच के स्राव को कम कर देता है जिससे मासिक धर्म की प्रक्रिया में बाधा आती है.
2. बीमारी की वजह से-
कभी-कभी छोटी बीमारियों की वजह से भी पीरियड्स में देर हो जाती है. लंबे समय तक रहने वाली बीमारियां भी पीरियड्स पर इफ़ेक्ट डालती हैं. हालांकि इनका प्रभाव अस्थायी होता है और जब ये बीमारियां खत्म हो जाती हैं तब पीरियड्स नार्मल तरीके से होने लगता है.

3. स्तनपान की वजह से-
स्तनपान कराने वाली महिलाओं में अक्सर ये दिक्कत पाई जाती है. उन महिलाओं का पीरियड्स तब तक नहीं नार्मल होता है जब तक वो स्तनपान कराती हैं.
4. गर्भनिरोधक गोलियों की वजह से–
गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल या फिर अन्य दवाओं के इस्तेमाल भी पीरियड्स में प्रोलेम करता है. ऐसे में लाइटर या फिर स्किप्ड पीरियड की भी शिकायत हो जाती है. अगर ऐसा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

5. मोटोपे की वजह से-
मोटापे की वजह से भी पीरियड्स नार्मल तरीके से नहीं होते हैं. पीरियड्स में देरी और पीरियड्स न आने का भी कारण होता है. नार्मल से भी कम वजन होना भी पीरियड्स के देरी से या न आने का कारण हो सकता है.
6. प्री-मेच्योर मेनोपॉज की वजह से–
35-40 साल की महिलाओं में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं. ऐसे में पीरियड्स आना भी बंद हो जाता है. अगर समय से पहले हो तो इसे ही प्री-मोच्योर मेनोपॉज कहा जाता है, जिसमे कई परेशानियां भी आती है.
