Homeराज्यउत्तराखण्डदेश ने माना उत्तराखंड के कौशल विकास का लोहा, मिला प्रमुख स्थान

देश ने माना उत्तराखंड के कौशल विकास का लोहा, मिला प्रमुख स्थान

12 हजार से अधिक युवा प्राप्त कर रहे प्रशिक्षण : डॉ. पंकज पांडेय

देहरादून। कौशल विकास ने सेवायोजन का जो कीर्तिमान कायम किया है वह डॉ. पंकज पांडेय जैसे वरिष्ठ आईएएस के प्रयासों का ही कमाल है अन्यथा युवाओं में हुनर पैदा करना इतना आसान नहीं था। युवा नौकरी तो चाहता है लेकिन उसके लिए हाड़तोड़ परिश्रम नहीं करना चाहता, पर डॉ. पंकज पांडेय ने जिस ढंग से प्रेरणा श्रोत बनकर युवाओं को प्रोत्साहित किया है, उसी का परिणाम है कि आज युवा कौशल विकास के लिए लगातार प्रयासरत है और लगभग 56 प्रतिशत महिलाएं तथा 44 प्रतिशत पुरुष कौशल विकास के माध्यम से अपने को चमकाने का काम कर रहे हैं। आंकड़े देखे जाए तो आईएएस डॉ. पंकज पांडेय के विभाग में आने से पूर्व कौशल विकास का प्रचलन न के बराबर था और लोग इस विभाग को ना के बराबर जानते थे। 2017 में लगभग 10500 से युवाओं को कौशल विकास में प्रशिक्षित किया जबकि 17-18 में यही संख्या 12000 से अधिक पहुंच गई है।
प्रदेश में त्रिवेंद्र सरकार कौशल विकास मिशन पर भी विशेष ध्यान दे रही है। यही कारण कि प्रदेश के इस मिशन में 29183 युवाओं ने अपना पंजीकरण कराया है जिनमें 31 व्यवसायिक क्षेत्रों में 127 प्रशिक्षण दाता, 429 समूह (बैच) प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं जो स्वरोजगार के माध्यम से औरों को भी रोजगार देंगे। उत्तराखंड कौशल विकास मिशन की दक्षता परिषद ने 22 से अधिक अनुबंध किए हैं और 120 से अधिक संस्थाओं की ओर से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके पीछे डॉ. पंकज पांडेय का प्रयास और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का निर्देशन है।
डॉ. पंकज कुमार पांडेय मानते हैं कि आज रोजगार बड़ी समस्या है, यही कारण है कि अब युवा कौशल विकास क्षेत्र में अपना रुझान व्यक्त कर रहे हैं लेकिन अधिकांश युवा सूचना तकनीक क्षेत्र, चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में विशेष रूचि ले रहे हैं। डॉ. पांडेय मानते हैं कि देहरादून के नारी निकेतन व जेलों तक में बंदियों को प्रशिक्षित करने का काम किया जा रहा है जो अपने आप में विशेष महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड वर्षों से नौकरी के अभाव में बेरोजगारों का गढ़ बनता जा रहा था। सेवायोजन आंकड़ों की माने तो उत्तराखंड में 989043 बेरोजगारों ने सेवायोजन कार्यालय में अपना नाम दर्ज करया है जिनमें महिला और पुरुष शामिल है। इन्हीं बेरोजगारों को सेवायोजित करने के लिए चमोली, पिथौरागढ़, देहरादून तथा अन्य क्षेत्रों मे कौशल विकास केंद्र खोले गए है। टाटा ट्रस्ट की ओर से चमोली और पिथौरागढ़ में क्षेत्रीय आवासीय कौशल विकास केंद्र खोले गए हैं जिनके माध्यम कौशल विकास कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। उत्तराखंड में 5 फरवरी 2013 में युवाओं को रोजगारपरक बनाने के लिए इस कौशल विकास केंद्र की स्थापना की गई थी, लेकिन कौशल विकास केंद्र आज एक रोजगार का माध्यम बनता जा रहा है, इसके पीछे मिशन निदेशक डॉ. पांडेय की भूमिका सर्वत्र सराहना हो रही है। यह पूरे प्रदेश में ही नहीं देश में महत्वपूर्ण विभाग माना जा रहा है, जिसका लाभ उत्तराखंड के युवाओं को निरंतर मिल रहा है।
डॉ. पंकज पांडेय के मार्गदर्शन में कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों में कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसे संयोग ही कहेंगे कि राष्ट्रीय स्तर पर चयनित उत्तराखंड के छात्रों को रूस में 2019 में होने वाली प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर मिलेगा। डॉ. पांडेय के प्रयासों से राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान हल्द्वानी में आटो बॉडी रिपेयर कारपेंटिंग और बिल्डिंग की प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थी जिसमें तमाम छात्रों ने प्रतिभाग गिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के सपनों को मूर्त रूप देने पर जुटे हुए डॉ. पंकज पांडेय। यही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का भी लक्ष्य। मुख्यमंत्री वर्ष 2020 तक एक लाख युवाओं को रोजगारयुक्त बनाना चाहते हैं, जिसका माध्यम कौशल विकास प्रशिक्षिण ही हो सकता है। डॉ. पंकज कुमार पांडेय इसी भगीरथ प्रयास को दिन-रात पूरा कर रहे हैं।

 

Vision Desk 3
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