यह पोस्ट उत्तराखंड के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और हरिद्धार जिले के एडीएम ललित नारायण मिश्र की फेसबुक वॉल से ली गई है। चूँकि ललित नारायण मिश्र सामाजिक सरोकार के मुद्दों से हमेशा जुड़े रहते है और वो अक्सर गरीब, असहाय और जरुरतमंदो की मदद करने में हमेशा आगे रहते है। कहा जाता है कि ललित नारायण मिश्र जंहा भी तैनात रहते है, वँहा निर्धनों, विकलांग लोगो को आर्थिक सहायता दिलाकर उनको रोजगार के लिए प्रोत्साहित भी करते है।योगः कर्मसु कौशलम
ये सत्तर साल के बुजुर्ग कोई सेलेब्रिटी नही हैं लेकिन जब भी मैं इन्हें देखता हूँ तो मन से सैल्यूट जरूर करता हूँ। करतार सिंह नाम के ये कर्मयोगी देहरादून जिले के डोईवाला चौराहे पर एक दुकान में सुबह से शाम तक दर्जी का काम कर अपने परिवार का पेट पालते हैं। जिस दुकान पर ये बैठे हैं वो इनकी नही है किसी नेकदिल ने अपने शटर के नीचे इन्हें बैठने को जगह दे रखी है और उस छोटी सी जगह में बड़ी खुशी खुशी ये अपने काम को अंजाम देते हैं। अर्धांगिनी के इस दुनिया से चले जाने के बाद छोटे बेटे के साथ तो रहते हैं लेकिन भरोसा अपने हुनर और पौरुष पर ज्यादा है । सत्तर साल की उमर में जब लोग जीवन से निराश हो जाते हैं उस पड़ाव पर इस शख्श की साधना किसी योगी की अनुभूति कराती है। इनकी तन्मयता देखकर आप दंग रह जाएंगे। सत्तर साल के इस नौजवान को शत- शत नमन
ये सत्तर साल के बुजुर्ग कोई सेलेब्रिटी नही हैं लेकिन जब भी मैं इन्हें देखता हूँ तो मन से सैल्यूट जरूर करता हूँ। करतार सिंह नाम के ये कर्मयोगी देहरादून जिले के डोईवाला चौराहे पर एक दुकान में सुबह से शाम तक दर्जी का काम कर अपने परिवार का पेट पालते हैं। जिस दुकान पर ये बैठे हैं वो इनकी नही है किसी नेकदिल ने अपने शटर के नीचे इन्हें बैठने को जगह दे रखी है और उस छोटी सी जगह में बड़ी खुशी खुशी ये अपने काम को अंजाम देते हैं। अर्धांगिनी के इस दुनिया से चले जाने के बाद छोटे बेटे के साथ तो रहते हैं लेकिन भरोसा अपने हुनर और पौरुष पर ज्यादा है । सत्तर साल की उमर में जब लोग जीवन से निराश हो जाते हैं उस पड़ाव पर इस शख्श की साधना किसी योगी की अनुभूति कराती है। इनकी तन्मयता देखकर आप दंग रह जाएंगे। सत्तर साल के इस नौजवान को शत- शत नमनअगर हमारी पोस्ट आपको अच्छी लगे, तो लाइक करे, दोस्तों तक पहुंचाने के लिए शेयर जरूर करे………