
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य मंत्री रेखा आर्य और आईएएस वी षणमुगम के बीच विवाद पर त्रिवेंद्र सरकार पर निशाना साधा है। रावत ने फेसबुक पर पोस्ट डालकर पूरे प्रकरण को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया है। रावत ने लिखा है कि हद हो गई है, सरकार की एक मंत्री अपने विभागाध्यक्ष को तलब करने के लिये पुलिस अधीक्षक को पत्र लिख रही हैं। और पत्र सार्वजनिक हो रहा है। उन्होंने लिखा कि सरकार का इकबाल खत्म हो चुका है और भ्रष्टाचार के लिये सरकार का साहस खुली चुनौती दे रहा है। रावत ने आरोप लगाया है कि विभागाध्यक्ष कम विभागीय कमीशन पर आउटसोर्सिंग एजेंसी को नियुक्त करते हैं और मंत्री भारी फीस अदा कर आउटसोर्सिंग एजेंसी को उपकृत करना चाहती हैं। मंत्री की नजर में विभागाध्यक्ष का निर्णय गड़बड़ घोटाला है। अब राज्य वासियों आप तय करिये कि इसकी सजा किसको दी जानी चाहिये! अपर सचिव को? मंत्री को या पूरी भाजपा सरकार को?
