देहरादून- उत्तराखंड में पहले चरण में मतदान होने के बाद यूं तो आमतौर पर शांति है लेकिन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हरीश रावत को ‘हरदा नहीं हारदा’ बताने के बयान से एक बार फिर राजनीतिक गलियारों मे हलचल मच गई है। हरीश रावत को मुख्यमंत्री की यह बात चुभ गई है और उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए ट्वीट किया था कि उनकी हार गिनाने वाले मुख्यमंत्री का घमंड जल्द ही टूट जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी फेसबुक पर हरीश रावत के खुला पत्र लिखकर जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि चुनाव में हार-जीत लगी रहती है। लोकतंत्र में जिताना व हराना जनता के हाथ में है। आपने ठीक कहा, कि आप लोगों की जुबां पर जिंदा हैं, लेकिन किन कामों के लिए जिंदा हैं, इसका अहसास आपको जनता 2017 में करवा चुकी है। लोगों के दिलों में कौन कितना जिंदा रहता है, इस बात का फैसला 23 मई को हो जाएगा। मैं समझ सकता हूँ, कि आप पर चुनाव का बहुत दबाव रहा होगा इसलिए आपकी जानकारी के लिए बता दूं, मैंने प्रदेश के करीब करीब हर कोने में 15 दिन में 60 जनसभाएं कीं और हर जगह जनता का भरपूर प्यार और समर्थन मुझे और मेरी पार्टी को मिला। जहां तक बात अहंकार की है, तो आप मुझे इस बात का जवाब दीजिए कि अहंकारी कौन है, अति आत्मविश्वास से कौन लबरेज था? और यह बात मैं इसलिए कह रहा हूं कि आपने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को नैनीताल लोकसभा क्षेत्र में रैली करने तक के लिए नहीं बुलाया। अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रति इतना अविश्वास क्यों? इसको मैं आपका अति आत्मविश्वास कहूं, या अहंकार? बहरहाल आप भी यह मान चुके हो कि आप के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आने से आपको फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता। जहां तक बात भेंट करने की है, वह हमेशा करते रहेंगे। जहां तक मेरी सरकार के कामों का सवाल है उसका आकलन भी जनता जनार्दन कर रही है और करेगी। आपकी बेचैनी मैं समझ सकता हूँ। खैर भगवान से मैं आपके स्वस्थ जीवन व दीर्घायु होने की कामना करता हूं।
