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अंगेलिया हाउसिंग फर्जीवाड़े मामले में सीबीआई ने पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा।

देहरादून – 19 साल पुराने बहुचर्चित अंगेलिया हाउसिंग फर्जीवाड़े में सीबीआई ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्री विभाग के अज्ञात अधिकारियों और पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अंगेलिया हाउसिंग प्राइवेट लि. की सात हजार बीघा जमीन से संबंधित एक केस वर्ष 2004 में हाईकोर्ट दायर हुआ था।

इस केस में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं हुआ। इस याचिका के साथ ही देहली कंपनी लॉ बोर्ड प्रिंसिपल बेंच दिल्ली हाईकोर्ट में भी अंगेलिया हाउसिंग की एक याचिका विचाराधीन थी। इसी बीच एक पक्षकार मौसमी भट्टाचार्यजी निवासी विद्युत निकुंज, पटपड़गंज, दिल्ली ने अपने साथियों के साथ खुद को फायदा पहुंचाने के लिए हाईकोर्ट के तीन फर्जी आदेश बनाकर कोर्ट में पेश किए थे। लेकिन, कुछ वर्षों के बाद सोसायटी के डायरेक्टर संतोष कुमार बंगला को इसका पता चल गया।

उन्होंने इसकी शिकायत हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से की। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले की जांच कराकर एफआईआर दर्ज करने के आदेश रजिस्ट्रार जनरल को दिए थे। रजिस्ट्रार जनरल ने 2013 में ही इस मामले में नैनीताल के मल्लीताल थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में यह मुकदमा दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया। लेकिन, जब तक हाईकोर्ट की अगली कार्रवाई होती, दिल्ली पुलिस इसमें अंतिम रिपोर्ट लगा चुकी थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले की क्रिमिनल रिट याचिका के रूप में सुनवाई की।

इसी बीच कंपनी के डायरेक्टर ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि इस मामले की सीबीआई जांच कराई जाए। पूर्व में कोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को आदेश दिए थे कि मामले की जांच इन-हाउस करें। जांच में कोर्ट का कोई आदेश हाईकोर्ट की फाइल में नहीं पाया गया। इसकी रिपोर्ट रजिस्ट्रार जनरल ने सील बंद लिफाफे में कोर्ट में पेश की। तब पता चला कि ये तीनों आदेश फर्जीवाड़ा कर बनाए गए हैं। इसमें प्रथमदृष्टया हाईकोर्ट की रजिस्ट्री विभाग के कुछ अधिकारियों का हाथ माना गया। हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2022 को सीबीआई जांच के आदेश दिए। सीबीआई ने जांच के बाद अब मौसमी भट्टाचार्यजी, धरमपाल यादव, कलिराम यादव, नरेश कुमार निवासी शास्त्रीनगर, मेरठ और अवधेश कुमार को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज किया है। इसमें हाईकोर्ट की रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों के नाम अज्ञात हैं।

अंगेलिया हाउसिंग की सात हजार बीघा भूमि में फर्जीवाड़े का मामला अधिवक्ता राजेश सूरी ने वर्ष 2004 में उठाया था। उन्होंने इसकी शिकायत विभिन्न विभागों से करने के साथ एक याचिका हाईकोर्ट में भी दाखिल की थी। आरोप लगाया था कि इस जमीन को फर्जीवाड़ा कर खुर्दबुर्द किया जा रहा है। राजेश याचिका की सुनवाई के लिए नैनीताल आते-जाते रहते थे। वर्ष 2014 में नैनीताल से लौटते वक्त उनकी रहस्यमय ढंग से मौत हो गई थी। उनकी बहन रीता सूरी ने हत्या का आरोप लगाते हुए रविकांत किरियाना समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। कोतवाली में दर्ज इस मुकदमे की विवेचना अब भी एसपी क्राइम की अध्यक्षता वाली एसआईटी कर रही है।

अधिवक्ता की हत्या के बाद भी जमीन को खुर्द बुर्द करने का काम बंद नहीं हुआ। राजेश सूरी के बाद इस लड़ाई को उनकी बहन रीता सूरी ने आगे बढ़ाया। अब वह इस मामले की पैरवी कर रही हैं। एक याचिका हाईकोर्ट में लंबित है। वर्ष 2019 में उनकी अर्जी पर ही इस जमीन को राज्य सरकार में निहित किया जा चुका है।

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