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हाईकोर्ट के इस आदेश से मची खलबली, बुलानी पड़ी आपात मीटिंग, वकीलों में भारी रोष…

नैनीताल – मुख्य न्यायाधीश ने आज सुनवाई करते हुए साफ कहा की हल्द्वानी में जो जमीन सरकार द्वारा हाई कोर्ट शिफ्ट के लिए दी गई हैं उसमे ज्यादातर जमीन वन भूमि हैं और उसमे से पेड हटाने होंगे ऐसे में हम नहीं चाहते की पेड कटे ऐसे में हम गोला पार हाई कोर्ट लें जाने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में हाई कोर्ट की एक और बेच के लिए सरकार ऋषिकेश के IDPL में जमीन आवंटित करें। उनके अनुसार 70 प्रतिशत मामले हरिद्वार और देहरादून के नैनीताल हाई कोर्ट आते हैं ऐसे में एक बेच ऋषिकेश में हो और एक नैनीताल में तो इससे राहत मिलेगी।

हरिद्वार जिले में ऋषिकेश स्थित इंडियन ड्रग्स एंड फार्मासूटिकल लिमिटेड (आईडीपीएल) की कुछ याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश ऋतु बाहरी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ में सुनवाई चल रही थी। इस याचिका में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी भी मामले में ऑनलाइन जुड़ी थी। सुनवाई के बाद आर्डर लिखाते समय मुख्य न्यायाधीश ने हाईकोर्ट को गौलापार शिफ्ट करने को गलत कदम बताते हुए कहा कि इसके लिए उपर्युक्त स्थल ऋषिकेश में आईडीपीएल की 850 एकड़ भूमि रहेगी। बताया गया कि इस भूमि में से 130 एकड़ भूमि में पूर्व कर्मचारी रहते हैं। न्यायालय में मौखिक आदेश पारित होते ही अधिवक्ताओं के बीच खलबली मच गई और सभी बार सभागार में एकत्रित हो गए। अधिवक्ता इतने नाराज दिखे की वो चलते कोर्ट में सीधे मुख्य न्यायाधीश से मिलने पहुंच गए। अधिवक्ताओं ने अपनी नाराजगी जताई तो न्यायालय ने उन्हें दोपहर दो बजे मिलने को कहा।

अधिवक्ता जितेंद्र चौधरी ने बताया कि उनकी याचिका के बाद आदेश लिखाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वो हाईकोर्ट को गौलापार शिफ्ट करने का वीरोध करते हैं। गढ़वाल क्षेत्र से आने वाले 70 प्रतिशत लोगों के लिए एक बेंच ऋषिकेश में स्थापित करने का प्रस्ताव किया। बांकी कुमाऊं के 30 प्रतिशत लोगों के लिए कोर्ट नैनीताल ही रहेगी।

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